आखिर क्यों बड़ा वर्ग इन ढोंगी बाबाओं ( dhongi baba ) के चंगुल में उलझता जा रहा हैं ??

पिछले 10 वर्षों में ही अनेक घटनाएं हुई हैं, जब हमारे देश में बाबाओं के अनुयायियों ने प्रशासन को ही नाकों चने चबाने में मजबूर कर दिया हो। चाहे वो संत रामपाल के अनुयायियों का सीधे प्रशासन से भिड़ना हो या राम रहीम के अनुयायियों का कानून व्यवस्था को अपने हाथ में लेना हो। dhongi baba
यहाँ तक कि अनेक अनुयायियों ने इस अंधविश्वास की कीमत अपनी जान देकर चुकाई हैं। हाथरस की घटना उन्ही में से एक हैं।
सबसे बड़ा प्रश्न यही हैं कि जब हमारे धर्म में अनेक देवी देवताओं की संकल्पना की गयी हैं। विश्व को मार्गदर्शन देने वाले अनेक शास्त्र मौजूद हैं।
उसके बाद भी आखिर ऐसा क्या कारण हैं जो लोग इन बाबाओं की अंध भक्ति में इतने पागल हो जाते हैं कि वो भूल ही जाते हैं कि उनका हित और अहित किसमें हैं ?

हाथरस की घटना के बाद शायद अब वो समय आ गया हैं जब इसपर गंभीरता से विचार किया जाए कि आखिर इन ढोंगी बाबाओं का चलन बढ़ने का  कारण क्या है  ? और बड़े स्तर पर जनता क्यों इनके चंगुल में उलझ जाती हैं ?

इस प्रश्न के विश्लेषण में निम्न कारण नज़र आते हैं –

  • सरकार द्वारा दायित्वों का गंभीरता से पूरा न करना –

वैसे तो हमारे संविधान में भी सामाजिक न्याय के लिए अनेक उपबंध किये गए हैं। और चुनाव के समय राजनीतिक दल भी इस प्रकार वादे करते हैं जैसे लगता हैं कि चुनाव बाद देश में राम राज्य आ ही जाएगा।

परन्तु चुनाव के बाद जब ये दल सत्ता में आते हैं तो जनता को  मूलभुत जरूरतों की पूर्ति हेतु इधर उधर भटकने पर मजबूर कर देते हैं। फिर कुछ लोग उभर कर आते हैं जो गरीब जनता की शिक्षा, स्वास्थ्य जैसी मुलभुत आवश्यकताओं कि पूर्ति करते हैं धीरे धीरे जनता का विश्वास इन लोगों में जमने लगता हैं।

और वहीं जब लगातार जनता की जरूरतों की पूर्ति इन लोगों से होती रहती हैं; तो धीरे धीरे जनता को इनके द्वारा दी गयी सुविधाओं की लत लग जाती हैं। तो फिर यही व्यक्ति इस विश्वास को जनता में अंध विश्वास तक बढ़ा देते हैं। फिर वहाँ से शुरू होता हैं अंध विश्वास का खेल। और वो व्यक्ति जनसेवक से एक बाबा के रूप में उभर कर आते हैं।

फिर वो गरीब, अशिक्षित जनता के सामने खुद को भगवान का संदेशवाहक के रूप में पेश करते हैं। और जनता को विश्वास दिलाते हैं कि उनके पास ऐसी शक्तियां मौजूद हैं जिनसे उनकी सभी समस्याओं का अंत हो सकता हैं। फिर वहीं व्यक्ति एक ढोंगी बाबा का रूप धारण कर लेता हैं।

इसलिए सरकार को जनता की मुलभुत आवश्यकतो की पूर्ति करने के लिए कदम उठाना ही होगा।
ऐसे अनेक किस्से सामने आते हैं जब किसी गंभीर बीमारी को ठीक करने को लेकर गरीब आदमी को अपने चंगुल में ये लोग उलझा लेते हैं।

  • न्याय के लिए प्रशासन का गंभीर और संवेदनशील न होना –

वैसे तो संविधान में भी अनेक अनुच्छेद हैं और संसद द्वारा अनेक कानून बनाये गए हैं जो कमजोर वर्गों की सुरक्षा के लिए प्रावधान करते हैं। परन्तु अनेक बार इन गरीब वर्गों को सुरक्षा और न्याय दिलाने के लिए प्रशासन सामने नहीं आ पाता हैं। जिससे कुछ क्षेत्रों में कुछ व्यक्ति अपने धन बल के दम पर इनको न्याय और सुरक्षा प्रदान करते हैं। जिसके बदले में जनता अपना विश्वास और श्रद्धा इन लोगों के चरणों में समर्पित कर देती हैं। जिससे फिर ये लोग उस श्रद्धा को अंध श्रद्धा बना कर उसका गलत प्रयोग अपना साम्राज्य खड़ा करने में करते हैं। उसी साम्राज्य की दीवारों के बीच एक लोभी ढोंगी आत्मा खुद को परमात्मा का रूप बताने लगती है।

  • शिक्षा व्यवस्था तार्किकता पर आधारित न होना –

हमें बचपन से ही रट्टा मार शिक्षा व्यवस्था द्वारा तोता बना दिया जाता हैं।
जिससे हमारी विश्लेषण की क्षमता या चिंतन की आदत समाप्त सी हो जाती हैं। भारत में आज एक बड़े वर्ग के साथ यही समस्या हुई हैं। यहाँ डिग्री धारको की संख्या जितनी तेजी से बढ़ी हैं, उस अनुपात में समझदार व्यक्तियों की संख्या नहीं बढ़ी हैं।

ऐसे में व्यक्ति किसी भी पहलु का सही से विश्लेषण नहीं कर पाता हैं। वह चिंतन का कार्य दूसरे व्यक्ति के हाथों में सौंप देता हैं। फिर वहीं व्यक्ति इसका नाजायज फ़ायदा उठाते हैं। और उनका प्रयोग अपने भोग विलास के साधन जुटाने मात्र में करते हैं।

इन्ही सब आधारों पर केवल कोई व्यक्ति ही गरीब और अशिक्षित लोगों को पागल नहीं बना रहे बल्कि धर्म प्रचारक भी लोगों का धर्म परिवर्तन कर रहे हैं। कल ही उत्तर प्रदेश हाई कोर्ट ने इसपर टिप्पणी की हैं। हाई कोर्ट ने कहा हैं यदि ऐसा होने से नहीं रोका गया तो देश में बहुसंख्यक धर्म भी अल्पसंख्यक बन जाएगा।

इन सब डोंगी बाबाओं से देश की गरीब, सीधी, भोली जनता को बचाना केवल सरकार का ही नहीं बल्कि एक तार्किक समझदार नागरिक का भी दायित्व बनता हैं।

इसके संभावित समाधान क्या हो –

  • सरकार अपने दायित्व निभाए दुर्गम, आदिवासी क्षेत्रों में मूलभूत आवश्यकताओं की पूर्ति करें।
  • सामाजिक संस्थाओ को आगे आना होगा।
  • अन्धविश्वास के खिलाफ सोशल मीडिया का प्रयोग करते हुई जनता को जागरूक बनाना होगा।
  • जो शिक्षा तार्किकता को बढ़ावा दे , उसे अपनाना होगा।
  • प्रशासन को न्याय दिलाने के लिए तत्पर और  संवेदनशील रहना होगा।
  • ढोंगी बाबाओ के खिलाफ सरकार को उचित कार्रवाही करने से पीछे नहीं हटना चाहिए।
  • जनता को कर्म पर विश्वास करके इन बाबाओं की भाग्य बना देने वाली बातों से दूर रहना होगा।

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