-:भारत का द्विहत्थी विद्यालय:-

-:AMBIDEXTROUS SCHOOL:-

भारत राष्ट्र विविधताओं, योग्यताओं एवं प्रतिभाओं से भरपूर राष्ट्र है। जहाँ बहुआयामी प्रतिभा विद्यमान है चाहे वह किसी भी रुप में हो। आज का हमारा लेख ऐसी ही विलक्षण प्रतिभा को समर्पित है, एक ऐसी प्रतिभा जिसकी कल्पना करना शायद ही वर्तमान समय में तो अकल्पनीय है। आज का हमारा लेख है मध्यप्रदेश राज्य के सिंगरौली जिले के एक स्कूल जिसका नाम है वीणा वादिनी पब्लिक स्कूल, जिसे भारत का द्विहत्थी विद्यालय INDIA’S ONLY AMBIDEXTROUS SCHOOL कहा जाता है, जहाँ सुविधाओं के नाम पर सिर्फ प्रोत्साहन एवं हिम्मत है लेकिन मजबूत इच्छाशक्ति के दम पर ऐसी विलक्षण प्रतिभा के बच्चे जो दोनों हाथों से अपना भविष्य लिख रहे है।

दुनिया में मात्र 1% लोग है जो अपने दोनों हाथों से लिख सकते है, उन्ही में से वीणा वादिनी पब्लिक स्कूल के बच्चे है जो ऐसी विलक्षण प्रतिभा को अपनाकर भारत राष्ट्र को गौरान्वित कर रहें है। ये बच्चे एक ही भाषा में नहीं बल्कि अलग-अलग भाषा में एक साथ दोनों हाथों से लिख सकते है।

-:भारत के द्विहत्थी विद्यालय के संस्थापक:-

-:FOUNDER OF AMBIDEXTROUS SCHOOL OF INDIA :-


“Ambidextrous” अर्थात अपने दोनों हाथों को हर मायने में बराबर ताकत से उपयोग करना। इन बच्चों में यह क्षमता है इसलिए इनको Ambidextrous कहते है, और स्कूल को Ambidextrous School कहा जाता है।
बच्चों में इस विलक्षण प्रतिभा का विकास करने मे जिस विलक्षण इंसान का अतुलनीय योगदान है उनका नाम है श्री बी•पी• शर्मा जी, जो वीणा वादिनी स्कूल के संस्थापक और प्रधानाचार्य है।

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श्री बी•पी• शर्मा जी

सेवानिवृत्त आर्मी ऑफिसर श्री बी•पी• शर्मा जी हमारे प्रथम राष्ट्रपति आदरणीय डॉ राजेन्द्र प्रसाद जी की Ambidextrous प्रतिभा से प्रभावित थे।


श्री बी•पी• शर्मा जी के अनुसार जो बच्चा नया होता है वो जिस हाथ से लिखता है, कुछ समय बाद उसे उसके दूसरे हाथ से अभ्यास कराया जाता है। फिर जब दूसरा हाथ भी सेट हो जाता है फिर बच्चों को दोनों हाथों से अभ्यास करवाते है। 45 मिनट की क्लास में प्रत्येक बच्चे को 15 मिनट दोनों हाथों से लिखने का अभ्यास कराया जाता है।


बच्चों के बेहतरीन आत्मविश्वास एवं एकाग्रता का मुख्य कारण है योग एवं ध्यान, जो यहाँ के बच्चों की समय-सारिणी में शामिल किया गया है। साथ ही वैज्ञानिक दृष्टिकोण के इस्तेमाल से खेल में भी पढ़ाई को ही स्थान दिया जाता है। इस स्कूल को एवं स्कूल के बच्चों को दुनिया का आश्चर्य कहना कही भी गलत सिद्ध नहीं होगा।

-:बच्चों के AMBIDEXTROUS होने का विश्लेषण:-


बहुत से मशहूर न्यूरो विशेषज्ञ भी इन बच्चों के बारे में कहते है कि हमारा मस्तिष्क हमारे दैनिक क्रियाकलापों की ही प्रतिक्रिया करता है, हम जिस प्रकार के क्रियाकलाप करते है हमारा मस्तिष्क उन्हीं क्रियाकलापों को शोषित कर हमारे मस्तिष्क के जरिये उन्हें प्रबल करता है। जिस प्रकार एक कुम्हार घड़े को आकार देता है, उसको उपयुक्त आकार प्रदान करने को उसी प्रकार हमारा मस्तिष्क हमारे क्रियाकलापों से आकार लेता है।

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विज्ञान के अनुसार हमारे मस्तिष्क का बायां हिस्सा, शरीर के दांए हिस्से पर नियंत्रण और मस्तिष्क का दांया हिस्सा, शरीर के बाएं हिस्से पर नियंत्रण करता है। इसी अनुसार लोग दाएं और बाएं हाथ से कार्य करते है। लेकिन जो लोग दोनों हाथों से कार्य करते है, उन्हें क्रास वार्य कहा जाता है, उनके मस्तिष्क के दोनों हिस्से एक साथ काम करने के लिए विकसित किए जा सकते है और उनका अपने मस्तिष्क पर एक साथ पूर्ण नियंत्रण होता है।

प्रशिक्षण से ये बच्चे अत्यधिक विलक्षण बुद्धि के हो जाते है, एक समय में एक से अधिक विषय पढ़ सकते है। इनके मस्तिष्क का विकास बहुत तेजी से होता है और यह बहुआयामी प्रतिभा के होते है।

वीणा वादिनी पब्लिक स्कूल जैसे अन्य स्कूल भी खोले जाने चाहिए, जहां पर बच्चों को मात्र किताबी ज्ञान नहीं बल्कि कुछ नया करने की प्रेरणा दी जाए।
वीणा वादिनी स्कूल भारत ही नहीं अपितु विश्व का एकमात्र ऐसा स्कूल है जहाँ प्रत्येक बच्चे को दोनों हाथों से लिखने का Ambidextrous बनने का प्रशिक्षण दिया जाता है साथ हीबच्चे अंग्रेजी, हिन्दी, उर्दू, संस्कृत, रोमन और अरबी आदि भाषा लिख एवं बोल सकते है।

भारत का द्विहत्थी विद्यालय| INDIA’S ONLY AMBIDEXTROUS SCHOOL| AMBIDEXTROUS SCHOOL

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