समाज की विकृत मानसिकता के कारण लड़की की स्कूटी का नंबर ही बना सर दर्द । Delhi Girl Can’t Ride Her New Scooty As The Number Plate Has SEX | scooty number plate sex 

कल खबरों में एक ऐसी खबर पढ़ने को मिली  जो हमे सोचने पर मजबूर करती हैं कि क्या हम उसी भारतवर्ष के नागरिक है जिनकी ऋषि परंपरा और ज्ञान का लोहा पूरा विश्व मानता था। 

दिल्ली में एक स्कूल में पढ़ने वाली लड़की की स्कूटी का नंबर कुछ इस प्रकार मिला कि उसमे अंग्रेजी के अक्षर इस प्रकार थे  –  S.E.X .  अब इसको लेकर ही वहाँ आस पास रहने वाले लोगो ने उस लड़की के भाई को देख कर गलत टिप्पणियाँ करनी शुरू कर दी।    

मामला ये है की दिल्ली की एक लड़की को स्कूटी का नंबर में ऐसी सीरीज प्राप्त हुई जिसमे S.E.X शब्द बन रहा है। उसके बाद लोगो ने लड़की के भाई को देख कर इस कदर टिप्पणियाँ की।  जिससे परेशान होकर लड़की ने स्कूल जाना ही बंद कर दिया हैं।  अब उसके घर वाले नंबर बदलने के लिए सरकारी दफ्तरों के चक्कर लगा रहे हैं। वो तो अधिकारी उसका कुछ समाधान कर ही लेंगे। पर यहाँ समाज की मानसिकता पर बात करना आवश्यक है कि समाज की विकृत मानसिकता के कारण आखिर किस सदी तक महिलाओ को कष्ट सहने पड़ेंगे और इस मानसिकता का समाधान कब और कैसे होगा।   

एक और हम प्राचीन भारत की समृद्ध परंपरा के विषय में बात करते नहीं थकते है। जहाँ विदेश से भी प्राचीन काल से ही लोग ज्ञान प्राप्त करने आते थे। ये सत्य भी है और ये सत्य कही से भी इन चंद गधो के वजह से झूठा नहीं हो सकता हैं।  परन्तु बात ये है कि जहाँ एक और भारत को दुबारा विश्व गुरु बनाने के बात हो रही है वही भारत में मौजूद गंदगी पर ध्यान देकर उसको खत्म करना भी अत्यंत जरुरी हैं।  

हमारे समाज में एक बड़ा वर्ग ऐसा भी है जो लड़कियों के प्रति होने वाले अपराधों में कुछ हद तक लड़कियों को ही जिम्मेदार ठहरा देते है। जैसे कि लड़कियों के साथ छेड़ – छाड़ की घटनाये इसलिए होती है क्योकि वो कपडे ही ऐसे पहनती हैं,  या कहेंगे कि लड़की देर रात घर से बहार क्यों निकलती हैं।

असल में अगर गौर से देखे तो ये वही आदमी हैं जो सीधे ये नहीं कह सकते हैं कि हम जानवर हैं तुम देर रात हमारे सामने मत आया करो।  अगर ऐसा करोगे तो हम कुछ गलत ही करेंगे।  ये साफ़ साफ़ ऐसा तो नहीं कह सकते अप्रत्यक्ष तोर पर लड़कियों को दोष देकर अपने अपराध की जिम्मेदार उन्हें ही ठहरा कर , उल्टा उनसे ही सवाल करने लगते हैं कि तुम देर रात घर से क्यों बहार आये।

चलो उन लोगो से एक सवाल है जो ये कहते हैं कि लड़कियों के कपडे और उनके कारण ही ऐसी हरकते होती है।  तो वो ये बताये कि अनेक ऐसी बाते आती है कि बुजुर्ग ओरतो के साथ तक बलात्कार किया गया।  और लड़कियों से देर रात तो छोड़ो घर में ही छोटी छोटी बच्चियों से बलात्कार कर दिया जाता हैं।  घर से रात को सोते हुए ही छोटी बच्चियों को सोते हुए उठा लिया जाता है।  अब बताओ इन बुजुर्गो ने कौनसे छोटे कपडे पहने थे या जिनके साथ घर में ही ऐसा हो जाता है।  वो कहाँ देर रात घर से बाहर घूम रही थी।

तो इससे ये तो सिद्ध होता है कि इसमें गलती हमारी मानसिकता की ही है बाकि तो सब अपनी गलती को छिपाने का बहाने मात्र हैं।  इस स्कूटी वाली लड़की को भी इन्ही मानसिकता वाले लोगो की वजह से स्कूल जाने से रोक दिया गया है।

इस तरह की मानसिकता कोई एक दिन में ही जन्म नहीं ले लेती है। ये सालो से पल रही होती है जब ये अपने उच्चतम बिंदु पर होती है तो ये अपराध करने लग जाती है।  इस मानसिकता को पलने के समय से ही रोक देना उचित होता ही।

किसी लड़की के प्रेम प्रस्ताव ठुकरा देने के कारण उस पर एसिड फेक देना , या उसको परेशान करना या बदला लेने के लिए किसी लड़की को बदनाम करने का प्रयास करना। ये सब बलात्कारी मानसिकता के ही लोग होते है।  इसका जन्म बिंदु स्कूल के दिनों से ही कुछ लड़को में देखा जा सकता हैं।

हमने भी स्कूल उसके बाद कॉलेज उसके बाद समाज में अनेक ऐसे लोग देखे है जिनकी बातो से स्पष्ट होता था कि इनके लिए लड़की मात्र एक उपभोग की वस्तु मात्र हैं।  इसे ही महिला का वस्तुकरण कहते है। इस मानसिकता का जन्म अगर स्कूल स्तर से ही बच्चे में पलने लगता है तो इसका समाधान भी वही से करने का प्रयास करना चाहिए।

ये वही लोग है जो कहते हैं कि अगर हमारी बहन को किसी ने आँख उठा कर भी देखा तो उसकी आँख निकाल लेंगे।  वही दूसरे की बहन को एक उपभोग की वस्तु के अलावा कुछ नहीं समझते है।  ये बात स्पष्ट है कि सरकार या प्रशासन प्रत्येक व्यक्ति की निगरानी नहीं कर सकते है। ऐसे अपराधों में समाज की जिम्मेदारी अधिक होती हैं।  अगर इस प्रकार के गंदे मानसिकता के लोग अगर लड़कियों पर टिप्पणियाँ कर सकते हैं तो समाज को इन इन जैसे लोगो के सामने खुल कर आना चाहिए। जब ही जाकर इस प्रकार के अपराधों को खत्म किया जा सकता हैं।

खैर यहाँ बात यही है कि इन जैसे मानसिकता वालो की वजह से किसी को भी अपने अधिकारों से वंचित नहीं किया जाना चाहिए।  इस मानसिकता की वजह से शिक्षा छोड़ देना समाधान नहीं हैं क्योकि इस मानसिकता के लड़के हर कदम पर मिल ही जाते है । स्कूल  में किसी लड़की की कॉपी में अश्लील बाते लिख देना ,  स्कूल में ही लड़की पर कुछ अश्लील लिख कर फेकना,  या परेशान करने के लिए चौक मारना , यहाँ केवल इसलिए कि लड़की तुमसे बात करना नही चाहती तो उसे परेशान करना  , उसको बदनाम करना। यहाँ ये बात स्पष्ट करनी जरुरी है कि शरारत और बतमीजी में भी थोड़ा अंतर होता हैं।  बतमीजी या अपराध को बच्चो की शरारत कह कर नजरअंदाज कर देना कही से भी सही नही हैं।

वही कपनियों में काम करने वाली लड़कियों के प्रति कार्य जगह पर गलत व्यवहार करना।  ये सब जगह मिलेंगे जो बलात्कारी मानसिकता को लिए घूमते हैं।

इन लोगो को ये नहीं पता होता कि लड़किया इतनी संवेदनशील होती हैं कि वो हर उस व्यक्ति के इरादे को आसानी से भाप लेती है जो उनके संपर्क में होते है। यहाँ लड़कियों को भी समझना होगा कि यहाँ इस संसार में कोई भी व्यक्ति सभी व्यक्तियों को खुश नहीं रख सकता है यहाँ अपनी सुरक्षा करना भी लड़कियों के लिए आवश्यक है।  अगर लगता है कि कोई व्यक्ति गलत मानसिकता रख कर ही बात करना चाहता है तो उससे पहले ही दुरी बना लेना अत्यंत आवश्यक होता हैं।

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