कोरोना काल मे इन 6 तरीकों से बच्चों को अवसाद से बचाएं

पूरा विश्व वर्तमान समय में एक कठिन परिस्थिति से गुजर रहा हैं। देश मे भी दिन – प्रतिदिन कोरोना के मामले बढ़ते जा रहे हैं। इन विषम परिस्थितियों में देश मे कोरोना वायरस ने एक ऐसे माहौल को जन्म दिया है जिससे बच्चो के मानसिक स्वास्थ्य पर भी खतरा उत्पन्न हो गया हैं। कोरोना काल मे इन 6 तरीकों से बच्चों को अवसाद से बचाएं ।
अनेक अस्पतालों से आई खबरों के अनुसार इस महामारी ने बच्चो के मानसिक स्वास्थ्य पर भी गहरा प्रभाव डाला हैं। एक केस के अनुसार एक बच्चे को जब डॉक्टर के पास ले जाया गया तो उन्होंने पाया कि बच्चे ने अचानक बोलना कम कर दिया हैं। वो पहले जितना बोलता था उससे कम बोल रहा था। डॉक्टर ने पाया कि बच्चे पर अवसाद का असर हुआ हैं। अतः ऐसी स्थिति से निपटने के लिए सभी बच्चो के घरवालों को तैयार रहना होगा।

6 तरीकों से बच्चों को अवसाद से बचाएं

कुछ ऐसे तरीके जिससे बच्चो को अवसाद से दूर रख सकते हैं -:

(1). फोन या TV कम देखने दे / स्क्रीन प्रयोग का समय कम करें -:

जब इंसान ज्यादातर नकारात्मक खबरों को देखता या पढ़ता हैं, तो उसके दिमाग पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता हैं। वर्तमान में अधिकतर बच्चे सोशल मीडिया का प्रयोग करते हैं। जिससे अनेक प्रकार की खबरें उन तक आसानी तक आ रही हैं। आज जिस प्रकार के हालात देश मे है, ऐसे में कुछ सही और कुछ झूठी खबरे भी बड़ा चढ़ा कर सोशल मीडिया पर प्रसारित हो रही हैं। ऐसे में उन्हें स्क्रीन से जितना दूर रखेंगे उतना ही सही रहेगा।
दूसरा स्क्रीन के ज्यादा पास रहने से बच्चो में चिड़चिड़ापन भी बढ़ता हैं। जिससे कही न कही अवसाद बढ़ने के भी ज़्यादा अवसर रहते हैं।

(2). बच्चों के साथ खेले -:

घर मे ही बच्चो के साथ कुछ खेल खेले । जैसे लूडो , कैरम बोर्ड आदि। खेलने से बच्चो का मानसिक स्वास्थ्य बेहतर होता हैं। खेल में जब बच्चे अपने दिमाग का प्रयोग सही दिशा में करते हैं तो वो बेवजह के सोच विचार से दूर रहते है । जिससे बच्चो को अवसाद से बचाने में मदद मिलती हैं।

(3). बच्चों को बुजुर्गों के पास कुछ समय बिताने दे -:

जब बच्चे अपने बढ़ो से उनके समय की कहानी या बाते सुनते है तो वो तब के समय और अब के समय का विश्लेषण करते हैं। जिससे उनका दिमाग सक्रिय रहता हैं और वो ज्यादा समय उन्ही बातों को सोचते हैं। बुजुर्गों के अनुभव भी बच्चो को जीवन के अनेक संघर्षो से लड़ने में मदद करते हैं। अतः बच्चे जितना अधिक समय बुजुर्गों के साथ बिताएंगे जितना समय उनकी कहानियां या बाते सुनने में व्यतीत करेंगे उतना ही फायदा बच्चो को मिलेगा ।

(4). बच्चो के साथ योग और ध्यान करें -:

ध्यान क्रिया भारत के पास एक ऐसी विद्या है जो अकेले अनेक समस्याओं का हल रखती हैं। परंतु दुर्भाग्य की बात है कि भारत आज इस विद्या से दूर होता जा रहा हैं। अगर प्रत्येक व्यक्ति 15 से 20 मिनट भी ध्यान क्रिया करे तो उसका लाभ वो 1 महीने में ही देख सकता हैं। ध्यान क्रिया में इंसान खुद को जानता हैं । खुद की समस्याओं को खुद ही सुलझाना सीखता हैं। एक ध्यान क्रिया के अनेक फ़ायदे हैं। अतः बच्चो के साथ ध्यान और योग क्रिया करें।

(5). बच्चो को पढ़ने के लिए किताबे दे -:

पढ़ना एक ऐसी आदत है जिसके अनेक फायदे हैं। इससे ज्ञान और विश्लेषण क्षमता तो बढ़ती ही है । साथ ही ये दिमाग की एक ऐसी क्रिया है जिससे इंसान अनेक तरह के अवसादों से भी बच सकता हैं। जरूरी नही की बच्चो को पाठ्यक्रम की ही किताबें पढ़ने को दी जाए। उन्हें कोई आध्यात्मिक पुस्तक दे सकते हैं, कोई कहानी की पुस्तक दे सकते है, कोई उपन्यास दे सकते हैं।

(6). कोई हॉबी अपनाने में मदद करे -:

हॉबी एक ऐसी आदत है जो हमे अनेक तरह से लाभ प्रदान करती हैं। एक अच्छी हॉबी हमारे व्यक्तित्व का विकास तो करती ही है साथ ही अनेक तरह से हमारी मदद भी करती है। ऐसे समय मे जब बच्चे ज्यादा समय घर ही मौजूद हैं । तो उन्हें कोई एक अच्छी हॉबी अपनाने में उनकी मदद करी जा सकती है। जो आगे जीवन भर उनके लिए लाभदायक रहेगी।

बच्चो को ड्राइंग बनाने के लिए कहे । या अगर घर मे कोई संगीत यंत्र है तो बच्चो को कहे कि उसे प्रयोग करना सीखें। या बच्चो को कविता लिखने के लिए कह सकते हो ।
इस तरह की आदतों से बच्चो के मस्तिष्क का विकास तो होता ही है। साथ ही बच्चों की रचनात्मक क्षमता (creativity) भी बढ़ती हैं।

इस तरह के अनेक ऐसे साधन या उपाय हो सकते है जिससे बच्चो को अवसाद से बचाया जा सकता हैं। अगर हम इन तरीकों को भी अपनाए तो आसानी से बच्चो के मानसिक स्वास्थ्य की देखभाल की जा सकती हैं।

यह भी पढ़े:-

शिक्षा का महत्व | IMPORTANCE OF EDUCATION |

कोरोना वायरस : न खुद डरे न दूसरों को डराए, जागरूक बने , सावधानी अपनाएं।

भारत का द्विहत्थी विद्यालय| INDIA’S ONLY AMBIDEXTROUS SCHOOL| AMBIDEXTROUS SCHOOL