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बच्चे का मज़ाक नहीं बनाया, बल्कि अपनी छोटी मानसिकता का परिचय दिया हैं। viral video- boy can not say months name / The child can’t speak months name properly

The child can’t speak months name properly / महीने के नाम को लेकर वायरल बच्चे का वीडियो

बच्चे का मज़ाक बनाने से पहले , एक गंभीर चिंतन जरुरी था।

आजकल नेट पर एक वीडियो बहुत अधिक वायरल ( The child can’t speak months name properly ) हो रहा है। जिसमें एक बच्चा महीने के नाम बताने में असमर्थ है और वह महीनों के गलत या अशुद्ध नाम बताता है। जिससे महीने के नाम सुन रहे कुछ युवा उसकी वीडियो बना रहे होते हैं । उस वायरल वीडियो में दिखाया गया है कि उसके महीने के नाम न बता पाने पर , वीडियो बनाने वाले व्यक्ति , उसका मजाक बनाते हैं।

इस वीडियो को यह कहते हुए वायरल किया जा रहा है कि यह कोरोनावायरस में लॉक डाउन का परिणाम है। ( boy viral video about months name ) The child can’t speak months name properly

जहां तक कहे इस वीडियो का मकसद मजाक के तौर पर इस बच्चे को वायरल करना है। जिससे इस बच्चे का मजाक बन सके , और इसके माध्यम से वो व्यक्ति अपना मनोरंजन भी कर सकें।

वीडियो के परिणामों पर गंभीर चिंतन आवश्यक –

परंतु हमने इस वीडियो के परिणामों और वीडियो बनाने वाले व्यक्तियों की मानसिकता के विषय में गंभीर चिंतन नहीं किया है। इस लेख में इस वीडियो से संबंधित कुछ ऐसे तथ्यों पर चर्चा की गई है जो समाज और देश के लिए अति आवश्यक है।

बच्चे के महीने के नाम ना सुना पाने में किसका दोष –

भारत एक बहुत बड़ा देश है जो सांस्कृतिक और भौगोलिक विविधता के लिए जाना जाता है परंतु भारत में सामाजिक असमानता या कहे कि सामाजिक विविधता भी एक बड़े स्तर पर मौजूद है। जहां कुछ वर्ग अत्यधिक संसाधन संपन्न है, जहां वह अपनी विलासिता की वस्तुओं को भी खरीदने में सक्षम है।
वही दूसरी तरफ़ भारत में एक वर्ग ऐसा भी है जो अपनी दिन प्रतिदिन की मूलभूत आवश्यकताओं जैसे कि शिक्षा , स्वास्थ्य , भोजन आदि का भी प्रबंध करने में सक्षम नहीं है।

Boy viral video about months name
Boy viral video about months name

हो सकता है कि यह बच्चा भी उसी सामाजिक असमानता के कुचक्र का एक भाग हो , जिसमें मूलभूत आवश्यकताओं को पूरा करना भी इतना आसान नहीं होता हैं। हो सकता है कि इस बच्चे को पर्याप्त संसाधन उपलब्ध ना हो पाए हो या एक ऐसा परिवेश या माहौल न मिल पाया हो , जिसमें यह अपना मानसिक विकास कर सके और एक अच्छे स्तर की शिक्षा ग्रहण कर सकें।
जिससे यह शिक्षा नहीं ग्रहण कर पाया हो और अपने मानसिक विकास में वृद्धि न कर पाया हो।

बच्चे की नहीं बल्कि खुद का मज़ाक बना गए (The child can’t speak months name properly)

इस वीडियो में हंसी का पात्र वह बच्चा नहीं बल्कि इस बच्ची की वीडियो बनाकर उस पर हंसने वाले और उसके बाद इस वीडियो को सोशल मीडिया पर वायरल करने वाले हैं व्यक्तियों की मानसिकता उससे ज्यादा हंसी और रहम की पात्र है।

क्योंकि यह बच्चा तो अपनी परिस्थितियों के कारण अशिक्षित रह गया है बल्कि वीडियो बनाने वाले व्यक्ति शिक्षित होने के बाद भी अपनी अनपढ़ता का परिचय दे गए।

क्योंकि अगर वह व्यक्ति शिक्षित होते हैं तो इस बच्चे पर हंसने की बजाए समस्या की गंभीरता को समझते हुए, उस पर चिंतन करते हैं । और अगर उसका समाधान करने के लिए सक्षम भी नहीं होते तब भी उस पर विचार-विमर्श करके कुछ ना कुछ चिंतन अवश्य करते हैं। यह भी सच है कि
प्रत्येक व्यक्ति प्रत्येक समस्या का समाधान नहीं कर सकता है परंतु गंभीरता से चिंतन अवश्य कर सकता है।

उनके इस हलके मजाक से बच्चे की मानसिकता पर पड़ सकता है गंभीर प्रभाव ( The child can’t speak months name properly)

व्यक्तियों ने अपने मनोरंजन के लिए इस बच्चे का वीडियो सोशल मीडिया पर तो वायरल कर दिया। परंतु उन्होंने इसके पीछे एक अन्य गंभीर समस्या का चिंतन बिल्कुल भी नहीं किया। हो सकते हैं कि यह वीडियो उस बच्चे के लिए जीवन भर एक समस्या बन जाए तथा यह भी हो सकता है कि इस इस वीडियो की वजह से उस बच्चे के बनने वाले मजाक से उसे मानसिक आघात भी पहुंच सकता है। जिससे वह गंभीर अवसाद से पीड़ित हो सकता है, और यह एक हल्का या घटिया मजाक उसके जीवन के लिए एक गंभीर नुकसान सिद्ध हो सकता है।

किसी को भी ऐसे मजाक केवल अपने मनोरंजन के लिए करने से पहले हजार बार यह सोचना चाहिए कि हमारे इस घटिया कदम से अगले पर किस किस प्रकार से नकारात्मक प्रभाव पड़ सकते हैं।

अगर समस्या के समाधान के बारे में नहीं सोच सकते तो खुद एक समस्या मत बने –

यह बहुत जरूरी है कि हम समाज में हमारे आसपास व्याप्त समस्याओं को गंभीरता से देखें और उन पर एक गंभीर चिंतन करने का प्रयास करें । यदि हम समस्या के समाधान के विषय में कुछ नहीं कर सकते तो कम से कम उसपर सोच सकते हैं। और अगर हम यह भी नहीं कर सकते तो यह हो भी हो सकता है कि हम खुद एक समस्या है, इसलिए किसी भी विषय में खुद समस्या बनने से पहले समस्या के समाधान पर चिंतन करना शुरू करें।

बच्चे का वीडियो बनाने वाले इस तरह से समाज के लिए समस्या हो सकते हैं कि जैसे ऊपर बताया गया हैं। यदि उनकी इस वीडियो से वह बच्चा जीवन भर अवसाद में चला जाता है । तो वह समाज के लिए एक बहुत बड़ी समस्या है और वीडियो बनाने वाले व्यक्ति भी खुद समाज और देश के लिए एक बहुत बड़ी समस्या सिद्ध हो जाएंगे।

वीडियो को आगे से आगे फॉरवर्ड करने वाले भी विचार करें ( The child can’t speak months name properly )

यहां पर केवल समस्या वीडियो बनाने वाले व्यक्तियों तक सीमित ही नहीं हो जाती है बल्कि यह आगे बढ़कर उन व्यक्तियों की भी जिम्मेदारी बनती है। जो इसे बार-बार आगे से आगे फॉरवर्ड करते जाते हैं । इस तरह की वीडियो पर अच्छे से सोच विचार करके ही इसे आगे वायरल करें।

जितने दोषी इस वीडियो को बनाने वाले हैं । उतने ही अधिक दोषी इस वीडियो को आगे वायरल करने वाले भी हैं।

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