डॉ एपीजे अब्दुल कलाम का भारत के युवाओं को लेकर सपना | Dr. A.P.J. ABDUL KALAM VISION AND THOUGHTS in Hindi |

 

 

APJ Abdul Kalam

 

अगर आपको सूरज की तरह चमकना है, तो पहले सूरज की तरह चलना होगा।

आज के इस लेख के माध्यम से हम राष्ट्र के उस चमकते सूरज को श्रद्धांजलि अर्पित कर रहे हैं, जिनके तेज और प्रकाश से पूरा भारत विश्व पटल पर दमक रहा है। इस लेख के माध्यम से हम श्रद्धांजलि अर्पित कर रहे हैं पुण्यतिथि विशेष पर भारत रत्न पूर्व राष्ट्रपति मिसाइल मैन के नाम से प्रसिद्ध डॉ एपीजे अब्दुल कलाम जी को। APJ Abdul Kalam

डॉ अबुल पाकिर जैनुलाब्दीन अब्दुल कलाम एक ऐसे महापुरुष जिनका नाम सुनते ही भारत वासियों का दिल और दिमाग ऊर्जा से भर जाता है। उनका ओजस्वी और मुस्कुराहट भरा चेहरा हम सभी के आँखों में हमेशा जिंदा है।

अब्दुल कलाम जी को याद करके हर भारतीय का सिर गर्व से उठ जाता है और हमें अपने जीवन की हर कठिनाई बहुत छोटी सी लगती है। क्योंकि उन्होंने कहा था कि :

आप अपना भविष्य नहीं बदल सकते पर आप अपनी आदतें बदल सकते हैं, और निश्चित रूप से आपकी आदत है आपका भविष्य जरूर बदल देंगे।

मिसाइल मैन अब्दुल कलाम जी एक महान शिक्षाविद, वैज्ञानिक और आधुनिक भारत के पुरोधा थे। अब्दुल कलाम जी के नेतृत्व में राष्ट्र के पहले स्वदेशी मिसाइल का कार्यक्रम की शुरुआत हुई। और देखते ही देखते उन्होंने स्वदेशी मिसाइलों की झड़ी लगा दी। APJ Abdul Kalam

अब्दुल कलाम जी इतने सरल थे कि उनको पीपल्स प्रेसिडेंट (People’s President) कहा जाता था। कलाम जी ने सादगी, मितव्ययता और इमानदारी की कई अनुकरणीय मिसाले पेश की। देश के विकास में उनका योगदान इतना विशाल है कि उन्हें शब्दों में पिरोना बहुत कठिन है। शिक्षा के प्रति उनका अथाह प्रेम था कि वह जीवन भर शिक्षा अर्जित करते रहे और अपने ज्ञान को सबके बीच बाटँते रहें।

वैज्ञानिक के रूप में हो या देश के राष्ट्रपति के रूप में, युवाओं और समाज के बीच वह हमेशा शिक्षा के प्रचार-प्रसार में लगे रहे। शिक्षा से उनका लगाव ही था कि वह अपने अंतिम समय में भी कि बच्चों को शिक्षा ही दे रहे थे। उनकी प्रेरणा, उनके विचार और उनके द्वारा दी गई शिक्षा हम सभी के लिए प्रेरणा है। APJ Abdul Kalam

 

भारत के पूर्व राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम तकनीक और विज्ञान में अपने योगदान के लिए विश्व प्रसिद्ध हुए। लेकिन जो सम्मान और लोकप्रियता उन्हें मिली उसके पीछे उनका शिक्षक रूप था। शिक्षा को शक्ति की खोज मानने वाले कलाम सर को अपने छात्र सबसे प्रिय थे। उनकी बातें छात्रों के दिल और दिमाग पर एक अमिट छाप छोड़ जाती थी।  आज भी उनके विचार छात्रों को सबसे ज्यादा प्रेरित करते हैं।

 

 

 

डॉ एपीजे अब्दुल कलाम | Dr. A.P.J. ABDUL KALAM | Biography of APJ Abdul Kalam

 

 

कलाम सर…………

डॉ एपीजे अब्दुल कलाम जी जिन्हें देशभर के छात्र प्यार और सम्मान से सर कहते थे। स्कूल के छात्र हो, इंजीनियरिंग के छात्र या प्रबंधन के छात्र इन सभी के सवालों को सुनकर पूर्व राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम जी की आंखों पर एक चमक आ जाती थी।

बच्चों सी मासूम मुस्कुराहट लिए कलाम सर हर सवाल का जवाब देते और जवाब के साथ एक नई सीख भी देते थे। शिक्षा के क्षेत्र में उनके योगदान और छात्रों के करीब रहने की उनकी पसंद दुनिया भर में अनुकरणीय है। APJ Abdul Kalam

एपीजे अब्दुल कलाम जी ने वैज्ञानिक के तौर पर मिसाइल रक्षा कार्यक्रम से देश को गौरवान्वित किया।  लेकिन अपने काम के साथ-साथ व शिक्षक के तौर पर वे हमेशा सक्रिय रहे। पूर्व राष्ट्रपति डॉ कलाम जी  का कहना था कि बच्चों को बचपन में दी गई शिक्षा ही उनके सारे जीवन का आधार होती है।

खुद का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा था कि बचपन से ही वह अपने गुरु अय्यर जी से इतना प्रभावित थे कि वह उनकी तरह ही एक शिक्षक बनना चाहते थे। एक बार उन्होंने कहा था कि 7 साल के लिए कोई बच्चा मेरी निगरानी में रह जाए फिर कोई भी उसे बदल नहीं सकता।

एक शिक्षक के तौर पर उन्होंने करोड़ों आंखों को बड़े सपने देखने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा:

सपने वह नहीं जो आप नींद में देखते हैं, सपने एक ऐसी चीज है जो आपको नींद आने नहीं देते हैं। 

भारतीय शिक्षा को आगे बढ़ाने के लिए कलाम जी हमेशा खुले विचार रखते थे। उनके दृष्टिकोण के मुताबिक प्राचीन शिक्षा और आधुनिक शिक्षा का समावेश ही एक संतुलित समाज की स्थापना करता है।  उनका मानना था कि हम जैसा समाज चाहते हैं हमें वैसे ही शिक्षा अपने बच्चों को देनी चाहिए। यही नहीं एक शिक्षक का जीवन कई दीपों को प्रज्वलित करता है, इसीलिए एक शिक्षक की अपने पेशे के प्रति प्रतिबद्धता होनी चाहिए।

ग्रामीण क्षेत्र के बच्चों को मिलने वाली शिक्षा की गुणवत्ता को लेकर भी उन्होंने चिंता जाहिर की। उन्होंने कहा कि बच्चों को कम से कम स्कूल बिल्डिंग मिले, कक्षा में खिड़कियां हो, पीने का पानी, पढ़ने के लिए लाइब्रेरी, शोधशाला और खेल का मैदान हो। इस लक्ष्य को पाने के लिए सरकार को शिक्षा में जीडीपी का 2% से 3% और खर्च करना होगा। APJ Abdul Kalam

अब्दुल कलाम जी को लगभग 30 विश्वविद्यालयों द्वारा मानद डॉक्टरेट की उपाधि प्रदान की गई थी।  राष्ट्रपति पद से रिटायरमेंट के बाद भी डॉक्टर कलाम ने आराम नहीं किया बल्कि देश के इंजीनियरिंग और मैनेजमेंट संस्थानों में वह विजिटिंग प्रोफेसर के तौर पर सक्रिय रहे।

छात्रों को लेकर अपने विचार और दृष्टिकोण अपनी नयी किताबों में जाहिर किया। छात्रों को प्रोत्साहित करने के लिए डॉ कलाम स्कूल और कॉलेजों में सेमिनार किया करते थे। कलाम जानते थे कि किसी व्यक्ति या राष्ट्र के समर्थ भविष्य के निर्माण में शिक्षा की क्या भूमिका हो सकती है। उनके पास भविष्य का एक स्पष्ट खांका था। जिसे उन्होंने अपनी पुस्तक इंडिया 2020 विजन फॉर द न्यू मिलेनियम मैं प्रस्तुत किया।

इंडिया 2020 बुक में ही उन्होंने लिखा कि भारत को वर्ष 2020 तक एक विकसित देश और नॉलेज सुपर पावर बनना होगा। कलाम सर वो शिक्षक थे जिन्होंने अपने जीवन के बेहतरीन पल छात्रों के साथ बिताये।  शिक्षा के प्रति उनका समर्पण जीवन के अंतिम समय में भी देखने को मिला। APJ Abdul Kalam

27 जुलाई 2015 को पूर्व राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम शिलांग गए थे। आईआईएम शिलांग (IIM Shilong) के एक कार्यक्रम के दौरान छात्रों को लेक्चर दे रहे थे, तभी लड़खड़ा कर गिर पड़े और उन्हें अस्पताल ले जाया गया जहां उन्होंने अंतिम सांस ली। अपने जीवन के अंतिम पल में भी कलाम सर अपने प्रिय छात्रों के बीच ही थे। कलाम सर हमेशा याद आएंगे और हम सबको प्रेरित करते रहेंगे।

 

 

राष्ट्र निर्माण में डॉ एपीजे अब्दुल कलाम जी का योगदान | Dr. A.P.J. ABDUL KALAM

 

भारत को मिसाइल और परमाणु शक्ति संपन्न बनाने वाले पूर्व राष्ट्रपति और भारत रत्न से सम्मानित डॉ एपीजे अब्दुल कलाम जितने महान वैज्ञानिक थे, उतने ही विराट व्यक्तित्व के धनी थे। उनके मन में हमेशा भारत को विकसित राष्ट्र बनाने का सपना पलता था। जीवन भर वह देश की शिक्षा व्यवस्था को सशक्त करने में जुटे रहे। उन्होंने 21 वी सदी के भारत का एक ऐसा सपना सपना देखा था, जिसमें देश हर दिशा में सशक्त हो और अपने लक्ष्य को हासिल कर सके। राष्ट्रीय निर्माण में उनका योगदान अतुलनीय है।

 

राष्ट्रपुरुष, मार्गदर्शक, एक महान वैज्ञानिक, दार्शनिक, सच्चा देशभक्त और ना जाने कितनी उपाधियों से सम्मानित डॉ एपीजे अब्दुल कलाम सही मायनों में भारत रत्न थे। सबसे बढ़कर एक अच्छे इंसान थे, जिन्होंने जमीन से जुड़े रहकर जनता के राष्ट्रपति के रूप में लोगों के दिलों में अपनी खास पहचान बनाई।  एक ऐसा इंसान जो बच्चों, युवाओं और बुजुर्गों सभी के बीच लोकप्रिय थे। देश का हर बच्चा, युवा उन्हें अपना आदर्श मानता था। APJ Abdul Kalam

डॉ कलाम ने देश के सशक्तिकरण और राष्ट्र निर्माण में अतुलनीय योगदान दिया। उन्होंने अपनी कुशलता से इसरो को नई ऊंचाई पर पहुंचाया। वो कलाम ही थे जिन्होंने भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) को आधुनिक तकनीक से परिचित कराया। तभी तो आज ISRO दुनिया की प्रमुख अंतरिक्ष एजेंसियों में अग्रणी भूमिका निभा रहा है।

आज भारत कम खर्चे पर अच्छे से अच्छे अंतरिक्ष अभियानों को सफलतापूर्वक अंजाम दे रहा है। इसमें डॉक्टर एपीजे अब्दुल कलाम की भूमिका को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है। यही नहीं आज अगर हम अपनी जमीन से हवा में मार करने वाली मिसाइल टैंक, भेदी मिसाइल और रेक्स मिसाइलों से खुद को सुरक्षित महसूस करते हैं तो इसमें सबसे महत्वपूर्ण योगदान मिसाइल मैन डॉक्टर अब्दुल कलाम का ही है।

 

अंतरिक्ष कार्यक्रम :

 

  • 1962 में भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन से जुड़ने के बाद डॉक्टर एपीजे अब्दुल कलाम अपनी कड़ी मेहनत, सूझबूझ और आसमान छू लेने वाली लगन और सपनों के कारण सफलतापूर्वक कई उपग्रह प्रक्षेपण परियोजनाओं में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
  • बतौर परियोजना निदेशक उन्होंने भारत का पहला स्वदेशी तकनीक वाले उपग्रह SLV-3 को बनाने में अहम भूमिका निभाई।
  • SLV-3 की मदद से जुलाई 1980 में रोहिणी उपग्रह को पृथ्वी की कक्षा में स्थापित किया गया।

 

डॉ कलाम ने कई साल इसरो में परियोजना निदेशक के रूप में भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम को काफी आगे बढ़ाया। देश में मिसाइल निर्माण और मिसाइल कार्यक्रम में डॉ कलाम की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है। भारत के रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन यानी डीआरडीओ (DRDO) के मिसाइल कार्यक्रम के वे अगवा रहे।

 

 

मिसाइल कार्यक्रम :

 

  • डॉक्टर कलाम की अगुवाई में ही अग्नि और पृथ्वी जैसे स्वदेशी तकनीक से बनी मिसाइलें तैयार हुई।
  • डॉक्टर अब्दुल कलाम ने ही 1980 के दशक में  इंटीग्रेटेड गाइडेड मिसाइल डेवलपमेंट प्रोग्राम को डिजाइन किया। जिसकी मदद से पृथ्वी, अग्नि, त्रिशूल, आकाश, नाग समेत कई ताकतवर मिसाइल बनी।
  • देश की पहली मिसाइल पृथ्वी डॉ कलाम की देखरेख में ही बनी थी।

इन मिसाइलों की सफलता के कारण डॉक्टर एपीजे अब्दुल कलाम मिसाइल मैन के नाम से लोकप्रिय हो गए। यही नहीं डॉक्टर कलाम के नेतृत्व में भारत ने 1998 में पोखरण में अपना दूसरा सफल परमाणु परीक्षण किया और परमाणु शक्ति से संपन्न राष्ट्रों की सूची में भारत शामिल हुआ। APJ Abdul Kalam

 

डॉ कलाम ने देश में मिसाइलों का निर्माण करके भारत की सुरक्षा को नए आयाम दिए। आज कोई भी देश भारत को आँख दिखाने से पहले 10 बार सोचता है तो इसके पीछे डॉक्टर कलाम की मेहनत का बड़ा योगदान है। यह डॉक्टर कलाम की दृढ़ इच्छा शक्ति ही थी, जिसने अत्याधुनिक रक्षा तकनीकी की भारत की चाह को साकार किया। चाहे परमाणु हथियार हो, देश का अंतरिक्ष कार्यक्रम हो, बैलिस्टिक मिसाइल परियोजना हो या लड़ाकू विमान परियोजना सभी में उनके अतुलनीय योगदान ने उनके नाम को हर भारतीय के जुबान पर ला दिया और देश का हीरो बना दिया।

 

जनता के राष्ट्रपति के नाम से मशहूर पूर्व राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम की सादगी, कम खर्च और ईमानदारी से जुड़े कई अनेक ऐसे किस्से हैं। जो प्रेरणा भी देते हैं और समाज को आईना भी दिखाते हैं। सादा जीवन, उच्च विचार और विनम्र व्यक्तित्व कि वह एक ऐसी विशाल थे जिन्हें पक्ष विपक्ष सभी लोग चाहते थे।  यही वजह थी कि जब जुलाई 2002 में वह राष्ट्रपति चुने गए तब बीजेपी के अलावा विपक्षी पार्टियों ने भी उनका समर्थन किया। APJ Abdul Kalam

 

 

राष्ट्रपति के रूप में डॉ एपीजे अब्दुल कलाम जी का योगदान | Dr. A.P.J. ABDUL KALAM as President of INDIA

 25 जुलाई 2002 देश के लिए बेहद अहम दिन था। देश के 11वें राष्ट्रपति के तौर पर भारत रत्न डॉक्टर एपीजे अब्दुल कलाम जी ने शपथ ली। डॉक्टर कलाम ऐसे पहले वैज्ञानिक थे जिन्हें राष्ट्रपति चुना गया। उनके चुनाव में राजनीति के दो धुर विरोधी पार्टियां कांग्रेस और बीजेपी एक साथ नजर आए। राष्ट्रपति चुनाव में हालांकि वामपंथी पार्टियों ने उन्हें चुनौती देने की कोशिश जरूर की। लेकिन जब नतीजा आया तो वह अब्दुल कलाम के पक्ष में था और 90 फ़ीसदी से ज्यादा वोटों से डॉक्टर कलाम निर्वाचित हुए।

एपीजे अब्दुल कलाम जी को शुरुआत में कई लोगों ने परंपरागत राष्ट्रपति समझने की भूल की। लेकिन राष्ट्रपति रहते हुए उन्होंने कर्मठता और सादगी की ऐसी मिसाल पेश की जो आने वाली पीढ़ियों के लिए मिसाल बन गई। डॉक्टर कलाम ने कभी अपने या परिवार के लिए कुछ बचा कर नहीं रखा। राष्ट्रपति पद पर रहते हुए उन्होंने अपनी सारी जमा-पूंजी और तनख्वाह एक ट्रस्ट के नाम कर दी।

उन्होंने भारत के प्रथम नागरिक के आधिकारिक निवास और शानो-शौकत वाले राष्ट्रपति भवन को आम लोगों और बच्चों के लिए खोल दिया। बतौर राष्ट्रपति उन्हें फिजूलखर्ची बेहद नापसंद थी। उन्होंने राष्ट्रपति भवन में बिजली के खर्चे में कटौती के लिए सौर ऊर्जा संयंत्र लगाने की पहल की। जिससे बिजली के खर्च में 25% से 30% की कमी आई।

यही नहीं राष्ट्रपति रहते हुए एक बार उनके कुछ रिश्तेदार उनसे मिलने राष्ट्रपति भवन आए तो कलाम ने अपने अधिकारियों को साफ निर्देश दे दिया था कि मेहमानों के लिए राष्ट्रपति भवन की कारें नहीं दी जाएंगी। इसके साथ ही उन्होंने मेहमानों के आने-जाने और रहने-खाने का सारा खर्च अपनी जेब से दिया।  पूर्व राष्ट्रपति से जुड़े कई ऐसे किस्से हैं जो उन्हें सबसे अलग बनाते हैं।

अपने कार्यकाल को पूरा करके जब कलाम राष्ट्रपति भवन से जा रहे थे तो उनसे विदाई संदेश देने के लिए कहा गया तब उन्होंने कहा था की विदाई कैसी मैं अब भी एक अरब देशवासियों के साथ हूँ।

अपने इन्हीं विचारों और उच्च आदर्शों के साथ जमीन से जुड़कर कलाम ने जनता के राष्ट्रपति के रूप में लोगों के दिलों में अपनी खास जगह बनाई थी। कलाम एक तरफ जहां सादगी भरा जीवन जीते थे वहीं दूसरी तरफ बिना दबाव के निर्णय लेने की उनकी क्षमता भी गजब की थी। यूपीए सरकार के दौरान एपीजे अब्दुल कलाम ने लाभ के पद से जुड़े विधेयक को मंजूरी देने से इनकार कर दिया था। इससे उन्होंने साबित किया कि वह एक रबर स्टैंप संवैधानिक प्रमुख नहीं है। उनके फैसले ने राजनीतिक गलियारे में हड़कंप मचा दिया था।

राष्ट्रपति बनने से पहले राजनीति से एपीजे अब्दुल कलाम का दूर-दूर तक कोई वास्ता नहीं था और राष्ट्रपति बनने के बाद भी राजनीति उनसे दूर ही रही। वह एक सर्वमान्य युवाओं, बच्चों और जनता के राष्ट्रपति के रूप में लोगों के बीच लोकप्रिय रहे जिन्हें देश का हर युवा अपना आदर्श मानता है।

 

डॉ एपीजे अब्दुल कलाम को 1981 में पद्मभूषण, 1990 में पद्म विभूषण और 1997 में देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान भारत रत्न से सम्मानित किया गया। डॉ एपीजे अब्दुल कलाम ने कई किताबें भी लिखी।  उनकी किताबों में विंग्स ऑफ फायर (Wings of Fire) उनकी ऑटो बायोग्राफी है। वही इगनाइटेड माइंड्स (IGNITED MINDS), आ मेनिफेस्टो फॉर चेंज, मिशन इंडिया(MISSION INDIA), इंस्पायरिंग थॉट्स (Inspiring Thoughts), माय जर्नी (MY JOURNEY), एडवांटेज इंडिया (Advantage INDIA), यू आर बोर्न टू ब्लॉसम (You are Born to Blossom), द लुमिनस स्पार्क (The Luminous Spark) और रीइग्नाइटेड (RIGNITED) छात्रों को प्रेरित करने वाली सबसे लोकप्रिय पुस्तक हैं।

 

वह तमिल में कविता भी लिखते थे और खाली समय में वीणा बजाना पसंद करते थे।

डॉ एपीजे अब्दुल कलाम 27 जुलाई 2015 को आईआईएम शिलांग (IIM SHILONG) में एक व्याख्यान दे रहे थे। जहां उनको दिल का दौरा पड़ा और उनकी स्थिति गंभीर हो गई उन्हें अस्पताल ले जाया गया। जहां बाद में कार्डियक अरेस्ट से उनका निधन हो गया।

डॉ एपीजे अब्दुल कलाम सादगी और सरलता जैसे गुणों से परिपूर्ण थे। एक वैज्ञानिक और महान शिक्षाविद के रूप में डॉ कलाम ने देश की अमूल्य सेवा की। भारत को एक समृद्ध और और उन्नत राष्ट्र बनाने का उनका सपना आज भी हमें प्रेरणा देता है। डॉ एपीजे अब्दुल कलाम ने 21वीं सदी में मजबूत और आधुनिक भारत के बारे में सपना देखा और इसे हासिल करने के लिए अपना पूरा जीवन लगा दिया।  उनका अनुकरणीय जीवन हर भारतीय के लिए एक प्रेरणा स्रोत है।

 

 

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