महात्मा बुद्ध ने पानी से ऐसे सिखाया शिष्य को मन शांत करने का तरीका। HOW TO CONTROL MIND IN HINDI

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HOW TO CONTROL MIND IN HINDI

जीवन में अनेक ऐसे पल आते है जब इंसान का मन अत्यंत अशांत या विचलित हो जाता हैं। इन्सान सामाजिक प्राणी है उसे अपनी दिन प्रतिदिन की जरूरत को पूरा करने के लिए समाज मे अनेक क्रियाएं करनी पड़ती है। जिस दौरान उसका संपर्क हर तरह के व्यक्तियों से होता है। जिसमें कुछ सकारात्मक मानसिकता के भी होते है तो कुछ नकारात्मक मानसिकता के भी।

कुछ लोग ऐसी नकारात्मक बाते कर जाते है जिससे हमारा मन अशांत हो जाता हैं। या जीवन मे आयी किसी समस्या या नकारात्मक समय के कारण भी मन अशांत हो जाता हैं। जिसमें हमारा मन कोई कार्य करने को नहीं करता हैं। ऐसे में हमारे कार्यक्षमता का भी नुकसान होता हैं। ऐसे में ये अत्यंत आवश्यक है कि मन को शांत किया जाए ।

जिस प्रकार यदि हम किसी लकड़ी को जल्दी काटना है तो उसके लिए जरूरी है कि कुल्हाड़ी की धार अच्छे से तेज होनी चाहिए । उसी प्रकार मन को शांत करने भी अत्यंत आवश्यक हैं। तभी हम आने कार्य को अच्छे से कर पाएंगे और कुछ नया सीख पाएंगे।

यहाँ ऐसी ही एक कथा का वर्णन किया गया है जिसकी सहायता से महात्मा बुद्ध अपने शिष्यों को मन शांत करने की विधि बताते हैं।

कथा –

HOW TO CONTROL MIND IN HINDI
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महात्मा बुद्ध ज्ञान प्राप्त करने के बाद , गाँव गाँव जाकर ज्ञान का प्रसार कर रहे थे। एक बार महात्मा बुद्ध किसी गांव में रुके हुए थे। उन्होंने अपने एक शिष्य को किसी तालाब से पानी लाने को कहा। जब शिष्य पानी लेने के लिए तालाब पर गया , तो उसने देखा कि पानी मिट्टी से गंदा हो रखा था। पूरे तालाब के पानी मे मिट्टी मिल रखी थी। तो शिष्य बिना पानी लिए महात्मा बुद्ध के पास जाता है और उन्हें पूर्ण वृतांत के विषय मे बताता हैं। तो महात्मा बुद्ध शिष्य से तालाब के आस पास की स्तिथि के बारे में पूछते हैं । शिष्य बताता हैं कि तालाब के पास बैल गाड़ी जा रही थी और लोगो का आवागमन भी हो रहा था; जिससे मिट्टी उड़कर पास के तालाब में जा रही थी।
तब महात्मा बुद्ध शिष्य से कहते हैं कि थोड़ी देर बाद पानी ले आना । कुछ समय बाद जब शिष्य तालाब पर पानी लेने जाता है तो वो स्वच्छ पानी लेकर आता हैं।

कहानी से क्या शिक्षा मिलती हैं –

यही स्तिथि हमारे मन के साथ भी होती हैं। समाज मे रहने के साथ अनेक विचारों या अनेक परिस्तिथियों से हमे गुजरना पड़ता हैं। जिससे अनेक बार हमारा मन भी अशांत हो जाता हैं। क्रोध , कष्ट आदि के कारण हमारे मन की स्तिथि भी उस तालाब के पानी के समान ही मैली हो जाती हैं। जिससे हमें शांति नहीं मिल पाती हैं , महात्मा बुद्ध के अनुसार जिस प्रकार पानी गंदा होने पर हम कुछ समय के लिए तालाब से दूर हटकर इंतज़ार करते है। उसी प्रकार ऐसी स्तिथि में भी हमें कुछ समय के लिए अपने मन से दूर हट जाना चाहिए।

जब मन अशांत हो तो कैसे बनाएं मन से दूरी –

ऐसी स्तिथि में हमें किसी शांत जगह पर जाकर , ध्यान की मुद्रा में बैठ कर अपनी सांसो पर ध्यान लगाना चाहिए। हमारी सांसे हमारी मानसिक स्तिथि के अनुसार परिवर्तित होती रहती हैं । जब हमें कोई भय होता हैं तो सांसो की गति अलग होगी , प्रसंता की स्तिथि में अलग होती हैं।
हमें वर्तमान समय के उसी क्षण पर अपना सम्पूर्ण ध्यान केंद्रित करना चाहिए। आप देखोगे कि जैसे पानी मे मिश्रित मिट्टी कुछ समय बाद नीचे बैठ जाती हैं उसी प्रकार हमारे मन मे भी उत्पन्न अनेक विकार जैसे कि क्रोध , तृष्णा आदि शांत होने लगते हैं और हमे स्वच्छ्ता का एहसान होने लगता हैं।

महात्मा बुद्ध ने पानी से ऐसे सिखाया शिष्य को मन शांत करने का तरीका|HOW TO CONTROL MIND IN HINDI

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