लीप वर्ष क्या है व क्यों 29 दिन का होता है ? 1900 वर्ष लीप वर्ष क्यो नहीं हैं ? Leap Year and related facts in hindi

 

हमारा वादा है कि इस लेख के बाद लीप वर्ष (Leap Year) से संबंधित आपके सभी डाउट दूर हो जाएंगे।
लीप वर्ष के विषय में अनेक विद्यार्थी कंफ्यूज रहते हैं। जैसे कि फरवरी में कभी 28 दिन तो कभी 29 दिन क्यों होते हैं ( Leap Year days ) ।

लीप वर्ष कैसे और क्यो होता है ( Leap Year kya hota hai / Leap Varsh kya hota hai ) ??
लीप वर्ष कैसे पता करें ( Leap Year kaise nikale )

अगर 4 से पूर्णतः भाग होने वाले वर्ष लीप वर्ष होते है तो 1900 लीप वर्ष क्यो नहीं हैं ??
अगर हर 4 साल बाद लीप वर्ष आता है तो 400 सालों में 100 लीप वर्ष क्यो नहीं होते ??

साधारण वर्ष , लीप वर्ष व सौर वर्ष क्या होते हैं –

 

साधारण वर्ष वह है जिसमे साल में 365 दिन होते हैं।
पृथ्वी द्वारा जितने समय में सूर्य का चक्कर लगाया जाता है उसे सौर वर्ष कहते हैं ।
लीप वर्ष वह है जिसमें 366 दिन होते है मतलब की जिस वर्ष में फरवरी 29 दिन की होती हैं। उसे लीप वर्ष कहते हैं।

लीप वर्ष में फरवरी 29 दिन की व साल 366 दिन के क्यों होते हैं ( Leap Year me 366 din kyu hote hai )

 

पृथ्वी सूर्य का चक्कर ठीक 365 दिन में पूरा नहीं करती हैं । पृथ्वी द्वारा सूर्य का एक चक्कर लगाने में 365 दिन 5 घंटे 48 मिनट 47.5 सेकंड का समय लगता हैं।

5 घंटे 48 मिनट 47.5 सेकंड लगभग 6 घंटे के करीब होता है। मतलब की प्रत्येक वर्ष 6 घंटे अतरिक्त जुड़ते रहते है। ये 6 घंटे 4 साल में 24 घंटे के बराबर हो जाते हैं। हम सब जानते ही है कि 24 घंटे 1 दिन के बराबर होता है । अतः हम मानते है कि 4 वर्ष में 1 दिन अतिरिक्त जुड़ जाता हैं।

अतः यही कारण हैं कि हम प्रत्येक 4 वर्ष में एक दिन फरवरी में अतिरिक्त जोड़कर मतलब की लीप वर्ष के द्वारा कैलेंडर को संतुलित करते हैं।

परंतु अभी रुको क्योंकि अभी लीप वर्ष की अवधारणा ख़त्म नहीं हुई है बल्कि कहे कि अब शुरू हुई हैं।

ओर अच्छी तरह से गणना करके इसको समझने का प्रयास करते हैं।

पृथ्वी द्वारा 365 दिन 5 घंटे 48 मिनट 47.5 सेकंड में सूर्य का एक चक्कर पूरा किया जाता है । अतः यह एक सौर वर्ष के बराबर होता है।

अब थोड़ी गणना देखते हैं-
यहाँ ओर अतिरिक्त 5 घंटे 48 मिनट 47.5 सेकंड को भी दिन में परिवर्तित करेंगे ।

5 घंटे 48 मिनट 47.5 सेकंड =

(5×3600 सेकंड) + (48 × 60 सेकंड ) + ( 47.5 सेकंड)

= 18000 + 2880 + 47.5

= 20927.5 सेकंड

अब हमें मालूम है कि 1 दिन में 24 घंटे होते है यानी कि 86400 सेकंड होते हैं।

86400 सेकंड = 1 दिन
20927.5 सेकंड = 0.2422 दिन

मतलब की 5 घण्टे 48 मिनट 47.5 सेकंड में 0.2422 दिन होंगे।

अतः हम कह सकते है कि एक सौर वर्ष 365.2422 दिन के बराबर होता है । अब यही हम देख सकते हैं कि पृथ्वी को सूर्य का एक चक्कर पूरा करने में 365 दिन से 0.2422  दिन अधिक लगते है।

यदि हम प्रत्येक वर्ष 365 दिन को लेते हैं तो इससे कैलेंडर में अशुद्धि आ सकती थी।

हम इसमें स्पष्ट देख सकते हैं कि 0.2242 दिन अतिरिक्त लगते हैं ।

अब यदि हम 0.2422  को 4 से गुणा करते हैं तो 0.9688 दिन प्राप्त होता है । जो 1 दिन से कुछ ही कम है। अतः इसको 1 दिन पूर्ण मानकर प्रत्येक 4 वर्ष बाद कैलेंडर में 1 दिन बढ़ा देते हैं। जिससे प्रत्येक 4 वर्ष पर लीप ईयर मनाया जाता है। परन्तु ऐसा करने पर भी एक अशुद्धि  उत्पन्न हो जाती हैं।

ऐसा करने से होता ये है कि प्रत्येक 400 वर्ष में 3 दिन अतिरिक्त जुड़ जाते हैं। आगे देखेंगे कि इस अशुद्धि को कैलेंडर से कैसे दूर किया जाता हैं।

लीप वर्ष का कैसे पता चलता हैं ( Leap Year kaise pata kare / How to check a year is Leap Year or not )

 

 

अब पहले ये जानेंगे कि कैसे पता करे कि कौनसा वर्ष लीप वर्ष हैं या नहीं । इसके लिए एक सीधी सी ट्रिक या कहे की फॉर्मूला उपलब्ध है। जिसमें वर्ष को 4 से भाग दे दिया जाता है । जो वर्ष पूर्णतः 4 से भाग हो जाता है वह लीप वर्ष होता हैं। परंतु यहाँ ध्यान देने वाली बात ये है कि शताब्दी वर्ष को 4 से नहीं बल्कि 400 से भाग देना होता है।

आख़िर ऐसा क्यों करते है ये जानने के लिए आगे पढ़ें।

शताब्दी वर्ष को 400 से क्यों भाग देते हैं –

 

शताब्दी वर्ष को 400 से क्यों भाग देकर ये पता चलता है कि वो लीप वर्ष हैं या नहीं

हमने ऊपर देखा कि लीप वर्ष की अवधारणा के अनुसार सौर वर्ष 365.2242 दिन लगते हैं। जिसमे 0.2242 दिन अतिरिक्त थे । जिसे हमने 4 से गुणा करके 0.9688 प्राप्त किया । 4 से गुणा मतलब 4 वर्ष में उसे 1 दिन के बराबर मानकर हर 4 वर्ष में कैलेंडर में 1 दिन अतिरिक्त करके लीप वर्ष में फरवरी 29 दिन की हो गयी ।

परंतु इससे भी एक अशुद्धि कैलेंडर में हो जाती हैं।

अतिरिक्त 0.2422 को 4 से गुना करने पर 0.9688 दिन के बराबर होता हैं। 0.9688 दिन 1 दिन से थोड़ा सा कम हैं। परंतु ये थोड़ा सा कम ही एक लंबे समय में जुड़ता जुड़ता एक बड़ा अंतर उत्पन्न कर देता है।

( 1- 0.9688 = 0.0312 दिन )
मतलब कि जब भी हम लीप वर्ष मनाते हैं 366 दिन लेते हैं। यानी के प्रत्येक 4 वर्ष में 0.0312 दिन फालतू ले लेते हैं।

अगर प्रत्येक 4 वर्ष को लीप वर्ष लेंगे तो 400 वर्षो में 100 लीप वर्ष होंगे। मतलब कि 100 × 0.0312 = 3.12 दिन।
मतलब की इस तरह तो 400 वर्षो में कैलेंडर 3 दिन आगे हो जाएगा। जिससे कैलेंडर में अशुद्धि आ जायेगी।

अतः इस अशुद्धि को सही करना अत्यंत आवश्यकता था। इसलिए 400 वर्षों में 4 शताब्दी वर्ष 100, 200 , 300 , 400 आएंगे और 400 वर्षों में 3 दिन ज्यादा हो जाएंगे।

इसलिए यदि 400 वर्षों में तीन लीप वर्ष को साधारण वर्ष( 365 दिन ) की भांति लिया जाएगा। तो यह अशुद्धि ठीक हो जाएगी । इसी कारण हर 400 वर्षों में प्रथम तीन शताब्दी वर्ष 100, 200 और 300 को लीप वर्ष नहीं माना जाता हैं।

तथा 400 वर्ष ही केवल लीप वर्ष होगा। इस प्रकार यहां यह ध्यान देने लायक बात है कि 400 वर्षों में केवल 97 लीप वर्ष पड़ेंगे। 

अतः यह भी एक तथ्य निकलकर सामने आता है कि प्रत्येक शताब्दी वर्ष लीप वर्ष नहीं होगा। केवल वही शताब्दी वर्ष लीप वर्ष होगा ।

जो 400 के गुणज होंगे यानी कि 400, 800 , 1200 , 1600 इत्यादि ही लीप वर्ष होंगे । जैसे कि 1700 , 1800 , 1900  लीप वर्ष न होकर साधारण वर्ष थे वही ४०० का गुणज वर्ष 2000 एक लीप वर्ष था।

अतः हम कह सकते हैं कि शताब्दी वर्ष को यह जानने के लिए कि वह लीप वर्ष है या
नहीं। इसके लिए में 400 से भाग देना होगा न कि 4 से।

इसीलिए 1900 , 4 से पूर्णतः भाग होने पर भी लीप वर्ष नहीं होता हैं। क्योंकि वह 400 से पूर्णतः भाग नहीं होता हैं।

 

 

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