महामारी की एक और दस्तक। ओमीक्रॉन वैरिएंट। कोविड-19। COVID-19। CORONA VIRUS। OMICRON VARIANT

 

OMICRON VARIANT IN HINDI

बीते कुछ दिनों में देश में कोविड-19 के मामले दिन-प्रतिदिन दोगुनी रफ्तार से बढ़ रहे है। हम सभी को इसके प्रति सजग रहने की आवश्यकता है। यदि हम सभी अपनी सूझ-बूझ से कोविड-19 संबंधी उचित व्यवहार का पालन करें, तो इस महामारी की दस्तक को शायद कुछ हद तक रोकने में सफल रहेंगे।

 

 ओमीक्रॉन वैरिएंट। OMICRON VARIANTओमीक्रॉन वायरस। OMICRON VIRUS

 

कोरोना वायरस ने एक बार फिर अपना रूप बदल लिया है। दक्षिण अफ्रीका में कोरोना का नया वेरिएंट पाया गया है, जो अब भारत में भी तेजी से फ़ैल रहा है, जिसे विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने ओमीक्रॉन नाम दिया है। WHO ने इसे ‘बेहद संक्रामक चिंताजनक स्वरूप’ करार दिया है। इससे पहले इस श्रेणी में कोरोना वायरस का डेल्टा स्वरूप था जिससे यूरोप और अमेरिका के कई हिस्सों में लोगों ने बड़े पैमाने पर जान गंवाई थी।

OMICRON VARIANT

इस वेरिएंट के लक्षणों की कम जानकारी के बीच विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) का अनुमान है कि SARS-CoV-2 का नया वेरिएंट उन लोगों को भी आसानी से संक्रमित कर सकता है, जिन्हें पहले कोविड हो चुका है या जिन्होंने पूरी तरह से वैक्सीनेशन करा लिया है। अभी तक के मामलों को देखते हुए विशेषज्ञों ने ओमिक्रॉन के कुछ लक्षण बताए हैं।

 

 

ओमीक्रॉन वैरिएंट के लक्षण। SYMPTOMS OF OMICRON VARIANTओमीक्रॉन वायरस के लक्षणSYMPTOMS OF OMICRON VIRUSOMICRON VARIANT

 

  • थकान :

पहले के वेरिएंट की तरह ही ओमिक्रॉन से थकान या ज्यादा थकावट हो सकती है। ओमिक्रॉन का शिकार हुआ व्यक्ति हमेशा थका हुआ महसूस करता है। ज्यादा मेहनत न करने पर भी उसे थकावट बनी रहती है और हमेशा आराम करने का मन करता है। आपको भी अगर बिना किसी कारण थकान रहने लगी है, तो एक बार डॉक्टर से चेकअप जरूर कराएं।

 

  • गले में खरोंच जैसा लगना : 

दक्षिण अफ्रीकी डॉक्टर, एंजेलिक कोएत्जी के अनुसार, ओमिक्रॉन से संक्रमित व्यक्तियों ने गले में खराश के बजाय ‘खरोंच’ की शिकायत की है, जो एक असामान्य बात है। ऐसे में यह कहा जाता सकता है कि गले में खराश इतनी ज्यादा बढ़ जाती है कि गले में जख्म जैसा महसूस होने लगता है। इससे गले में दर्द भी बढ़ जाता है।

 

  • हल्का बुखार :

कोरोना वायरस की शुरुआत के बाद से हल्का से मध्यम बुखार कोविड19 के बताए गए लक्षणों में से एक है, लेकिन ओमिक्रॉन में बुखार माइल्ड रहता है और कई दिनों तक बना रह सकता है। तेज बुखार के मामले कम देखे गए हैं। ओमिक्रॉन में शरीर का तापमान कई दिनों तक बढ़ता रहता है।

 

  • रात में पसीना आना और शरीर में दर्द होना :

दक्षिण अफ्रीका के स्वास्थ्य विभाग के डॉक्टर अनबेन पिल्ले ने उन लक्षणों को बताया है, जो ओमिक्रॉन में मरीजों में अब तक देखे गए हैं। उनका कहना है कि रात के समय पसीना आना भी इस बीमारी का लक्षण है। सबसे हैरानी की बात यह है कि इस बीमारी से पीड़ित व्यक्ति अगर एसी चलाकर या ठंडी जगह पर भी सोता है, तो भी उसे पसीने आते हैं।

 

  • सूखी खांसी :

ओमिक्रॉन से पीड़ित लोगों को सूखी खांसी भी हो सकती है। यह लक्षण कोविड-19 के लक्षणों में भी दिखाई दिया था। सूखी खांसी तब होती है, जब आपका गला सूखता है या फिर आपके गले में इंफेक्शन होने की वजह से कुछ अटका हुआ-सा लगता है। सूखी खांसी बढ़ने से गले में दर्द बढ़ता जाता है और कुछ भी खाने-पीने में परेशानी होती है।

 

महामारी की एक और दस्तक। ANOTHER VARIANT OF COVID-19OMICRON VARIANT 

 

कुछ माह पूर्व तक कोविड-19 के मामलों में दिन प्रतिदिन गिरावट का दौर था, जिससे लग रहा था कि जल्दी ही जीवन सामान्य हो जाएगा। लेकिन ओमिक्रॉन (कोरोना वायरस का नया रूप जिसकी संक्रमण दर बहुत तीव्र मणि जा रही है) ने लगभग सब कुछ बदल दिया और अब प्रतिदिन संक्रमण के मामले बढ़ते जा रहे हैं।

भारत में पिछले 24 घंटो में लगभग 58,000 से अधिक मामले दर्ज किए गए है , केवल दो हफ्ते में लगभग 5,000 मामलों से 12 गुना। राष्ट्रीय स्तर पर टेस्ट पॉजिटिविटी रेट(टीपीआर) भी दो फीसदी को पार कर गया है।

दिल्ली, कोलकाता और मुंबई में वृद्धि कोरोना वायरस तेजी से फैल रहा है। हालांकि भारत ने आधिकारिक तौर पर केवल 2000 ओमिक्रॉन मामलों की पुष्टि की सूचना दी है, जबकि विशेषज्ञों का मानना है कि मौजूदा मामलों में से अधिकांश (50 से 80 फीसदी) मामले ओमिक्रॉन के कारण हैं।

 

 

कोरोना की तीसरी लहर | ओमीक्रॉन वायरस | THIRD WAVE OF CORONA | OMICRON VIRUS | OMICRON VARIANT

 

कोविड-19 के वैरिएंट ओमिक्रॉन है, डेल्टा है या कोईअन्य प्रकार है-यह जानने के लिए जीनोमिक सिक्वेंसिंग की जरूरत पड़ती है। जीनोमिक सिक्वेंसिंग वाले कुल मामलों में ओमिक्रॉन की हिस्सेदारी तेजी से बढ़ रही है। दिल्ली में सभी मामलों में से लगभग 80 फीसदी मामले ओमिक्रॉन के हैं।

दक्षिण अफ्रीका, ब्रिटेन और अन्य देशों के अनुभवों के अनुसार, ऐसी आशंका है कि जल्द ही ओमिक्रॉन पूरे भारत में डेल्टा वैरिएंट की जगह ले लेगा या शयद उससे भी अधिक तीव्र गति से फैलेगा। पिछले छह हफ्तों में, ओमिक्रॉन के बारे में बहुत सारे वैज्ञानिक आंकड़े सामने आए हैं और इसे लेकर समझ बढ़ी है।

डेल्टा वैरिएंट की तुलना में ओमिक्रॉन तीन से चार गुना अधिक संक्रमणीय है। अर्थात अगर डेल्टा से प्रभावित एक व्यक्ति दूसरे व्यक्ति को संक्रमित करने में सक्षम होता है, तो ओमिक्रॉन से संक्रमित प्रत्येक व्यक्ति तीन से चार लोगों को संक्रमित कर सकता है।

टीकाकरण रोग के जोखिम को कम करता है। टीकाकरण न होने पर जोखिम अधिक है, लेकिन टीकाकरण होने पर भी संक्रमण हो सकता है।

दक्षिण अफ्रीकी देशों में देखा गया कि ओमिक्रॉन के मामले बहुत तेजी से बढ़ते हैं और उतनी ही तेजी से आम तौर पर दो या तीन हफ्तों में गिरते भी हैं। संक्रमण के मामलों में वृद्धि होने के बावजूद अस्पताल में भर्ती होने की नौबत नहीं आती है।

इन बढ़ते मामलों से यह कह सकते है कि यह भारत के लिए एक नई लहर का शुरुआती संकेत है। मामले तेजी से बढ़ रहे हैं, लेकिन अस्पताल में भर्ती होने की दर कम बनी हुई है। चुनिंदा इलाकों में मामले बहुत तेजी से बढ़ रहे हैं।

तीसरी लहर पूरे देश में एक साथ नहीं आ सकती है। प्रारंभ में, प्रमुख शहर अन्य बड़े शहरों की तुलना में अधिक प्रभावित हो सकते हैं। छोटे जिलों और ग्रामीण भारत में कुछ हफ्तों के अंतराल के बाद संक्रमण के मामले में वृद्धि संभव है। हालांकि कब और किस हद तक संक्रमण होगा, कोई भविष्यवाणी नहीं
कर सकता, इसलिए हम सबको तैयार रहने की जरूरत है।

हाल ही में 15 से 18 वर्ष के बच्चों के लिए टीकाकरण की शुरुआत हुई है, जो इस आयु वर्ग के 7.4 करोड़ किशोरों को टीके के लिए योग्य बनाता है। फिर 10 जनवरी से स्वास्थ्य कार्यकर्ता, अग्रिम पंक्ति के कार्यकर्ता और सह-रुग्णता वाले 60 से अधिक उम्र के लोगों को टीकेकी तीसरी खुराक (जिसे बूस्टर कहा जा रहा है) दी जाएगी।

टीकाकरण गंभीर बीमारी और अस्पताल में भर्ती होने से बचाता है। हालांकि संक्रमण को रोकने में यदि टीकों की कोई भूमिका है, तो वह बहुत सीमित है। इसलिए पूरी तरह टीकाकरण के बाद भी यह गारंटी नहीं है कि व्यक्ति संक्रमित नहीं होगा।

संक्रमण रोकने के लिए नाक और मुंह को ढकने वाले मास्क पहनने की जरूरत है, जरूरी न हो, तो यात्रा करने से बचना चाहिएं, यदि किसी से मिलना जरूरी हो, तो बंद स्थानों के बजाय खुली जगह में मिलना बेहतर होगा।

फिलहाल आशावादी होने का कारण है। बड़े शहरों में मामले तेजी से बढ़ रहे हैं, लेकिन सभी शहरों में संक्रमण बढ़ रहा है। पर हो सकता है कि

समय है कि हर कोई व्यक्तिगत स्तर पर कोविड उचित व्यवहार का पूरी तरह पालन करे, खासकर यदि आपके जिले में मामले बढ़ रहे हैं। पूरी तरह से टीके लगवाएं और यदि आप सावधानी बरतना चाहते हैं,
और उसके योग्य हैं, तो तीसरी डोज जरूर लगवाएं। यदि कोई लक्षण दिखता है, तो जांच करवाएं। यदि जांच करवाने में देरी होती है, तो मास्क लगाएं और तब तक लोगों से न मिलें, जब तक रिपोर्ट न आ जाए। समय
आ गया है कि उच्च जोखिम वाले लोग अपनी रक्षा स्वयं करें।

सरकारों को प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों को मजबूत करना चाहिए, जहां लोग जरूरत पड़ने पर जाकर परामर्श ले सकें और जांच करवा सकें।

आने वाले दिनों में देश में कोविड-19 के मामले बढ़ने की आशंका है। इसलिए सतर्क रहने की जरूरत है, पर घबराने की जरूरत नहीं है। हर कोई कोविड संबंधी उचित व्यवहार का पालन करता है, तो यह लहर न्यूनतम प्रभाव के साथ खत्म हो जाएगी। हम सभी को महामारी की इस लहर का मुकाबला करने के लिए अपनी ओर से प्रयास करना चाहिए।

 

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