ज्यादा सोचना कैसे बंद करें | How to Stop Overthinking ?

 

 

How to Stop Overthinking

आज के इस लेख के माध्यम से हम एक ऐसी समस्या पर आपको बताएंगे जिससे लगभग हर दूसरा व्यक्ति परेशान है। आज का हमारा लेख है Overthinking (ज्यादा सोचना) या जिसे हम दूसरे शब्दो में कह सकते है Chatter of Mind या Jyada Sochna Kaise Band Kare (How to Stop Overthinking in Hindi)।

वर्तमान समय में यह समस्या विकराल रूप लेती जा रही है। सोचने की क्षमता एक वरदान है, पर हमने उसे एक अभिशाप बना दिया है। सोचना बुरा नहीं है पर यही वह चीज़ है जो हमे किसी अन्य प्राणी या जीव से अलग करती है।

 

 

ज्यादा सोचना | Overthinking 

 

Overthinking (ज्यादा सोचना) एक आदत है, अगर सटीक शब्दों में कहा जाये तो एक addiction (लत) है। ज्यादा सोचने वाले लोग अकसर हर बात को लेकर बहुत जयादा सोचते है। और आप अंदर से इनके बारे में सर्च करेंगे तो पाएंगे कि इनकी लगभग ८०% बातें या विचार नकारात्मक होती है। जो २०% सकारात्मक बचते है वो सब उनके सपने होते है।

ज्यादा विचार करने वाले लोग हमेशा अपने past (भूतकाल) के ख्यालों में खोए होते है।  की हमारे पास्ट में ये गलत हुआ या ऐसा हो सकता था, या वैसे हो सकता था। काश उसने मुझसे ऐसा न कहा होता या उसने मुझसे ऐसा क्यों कहा आदि ऐसे ख्यालों को सोचते सोचते उन्ही में खो जाते है। और इसी प्रकार इन ख्यालों की श्रृंखला शुरू हो जाती है। ये ख्याल भविष्य के असमंजस को लेकर भी हो सकते है। जैसे : अगर ऐसा हुआ तो ? अगर ऐसा हुआ तो मैं क्या करूँगा ? वैसा हुआ तो ?

इनमें अधिकतर ख्याल काल्पनिक होते है क्योंकि ऐसा कुछ होने वाला ही नहीं है। लोग यहाँ तक सोचते है कि उसने ऐसा कहा तो मैं क्या कहूंगा ?

Overthinking (ज्यादा सोचने) में Over planning भी आती है और Over analysis भी और यही चीज़ आपको किसी भी कार्य में फोकस नहीं करने देती। एक विचार से लोग हज़ारो विचारो की श्रृंखला बना लेते है और इतना अंदर तक चले जाते है की यह भी भूल जाते है कि विचार शुरू कहा से हुए थे। यह विचार हर पल बदलते रहते है। इन विचारो में वैज्ञानिक पैटर्न देखे तो हमे पता चलेगा कि वास्तव में ज्यादा सोचना दिशाहीन होता है। सोचना गलत नहीं है, यह तो वरदान है पर दिशाहीन सोचना बहुत गलत है।

 

 

ज्यादा सोचने (Overthinking) से बचना क्यों जरुरी है ?

 

ज्यादा सोचने (Overthinking) से बचना क्यों जरुरी है ? 

अगर यह ज्यादा सोचना आपको अच्छी भावना देती या आपको फायदे पहुँचाती तोह क्या आप इसे बंद करना कहते नहीं बल्कि यह आपको तकलीफ देती है इसीलिए आप इसे बंद करना चाहते है। अर्थात हमने अपने इस वरदान को अपना शत्रु बना लिया है। अंग्रेजी में एक कहावत है :

The ability to think is a miracle, not a problem.

यह एक वरदान है, परन्तु हम इसका गलत इस्तेमाल कर रहे है इस कारण यह हमे तकलीफ दे रही है।

ज्यादा सोचने से छुटकारा पाने के लिए हमे सबसे पहले यह समझना होगा कि नासमझी और विचारहीनता एक काल्पनिक बात या कल्पना है। हम नासमझ और विचारहीन नहीं हो सकते, जीते जी तो नहीं हो सकते।हम अपने दिमाग को या उसमे आने वाले ख्याल या विचार को बंद नहीं कर सकते।

अगर हम अपने ख्याल या विचार को रोकते है तो हम अपने ही अंदर अपने ही विचारो का एक अंबार खड़ा कर लेंगे। जिससे हमारे अंदर एक अंतर्द्वंद पैदा हो जायेगा जोकि हमको एक तरफ से चिंता या एंजाइटी की तरफ धकेल देगा। हम ज्यादा सोचने (Overthinking) से परेशान है इसका अर्थ समझना आवश्यक है।

 

 

Jyada Sochna Kaise Band Kare

 

ज्यादा सोचने (Overthinking) से हमारा दिमाग वर्तमान में फोकस नहीं कर पाता है। और इसी कारण हमे अपना फोकस बढ़ाना है और वर्तमान में जीना है। किसी भी टॉपिक पर ज्यादा सोचना (Overthinking) हमारे निर्णय को कमजोर कर देती है। हद से ज्यादा सोचने वाले लोग अकसर कुछ कार्य नहीं कर पाते इसीलिए सफल नहीं हो पाते वो केवल सोचते रह जाते है, योजना बनाते रह जाते है।

अपना फोकस बढ़ाने और वर्तमान में रहने का सबसे आसान तरीका है meditation (ध्यान)। हमको meditation (ध्यान) को अपने प्रतिदिन की दिनचर्या का हिस्सा और आदत बनाना होगा। और अच्छे से अभ्यास कर प्रतिदिन ध्यान करना होगा। यह वैज्ञानिकता से प्रमाणित है कि ध्यान से हमारे दिमाग का आगे का हिस्सा मजबूत बनता है। हमारे दिमाग का यही वह भाग है जो हमारे फैसला लेने की क्षमता में, फोकस में और एकाग्रता में मदद करता है।

Meditation (ध्यान) सीखने के लिए हमारे इस लेख को भी आप पढ़ सकते है :

 

मैडिटेशन / ध्यान क्या हैं , कैसे करें , इसके फायदे | MEDITATION KAISE KARE , BENEFITS IN HINDI

 

हमे अपने विचार से लड़ना नहीं है आपको सिर्फ उन्हें ऑब्ज़र्व करना है। हम उन नकारात्मक विचारो से जितना लड़ेंगे उतना ही वह विकराल होता जायेगा हमारा उन नकारात्मक विचारो में ध्यान देना ही उनकी ताकत बढ़ाता है।

हमको अपने नकारात्मक विचारों को तवज्जो नहीं देनी है उन्हें ऑब्जर्व कर जाने देना है। इस प्रक्रिया को जब हम बार-बार दोहराएंगे तो हम पाएंगे की जो नकारात्मक विचार है इनकी फ्रीक्वेंसी कम होती जा रही है या इनकी ताकत काम होती जा रही है। और इससे यह धीरे-धीरे हमारी जिंदगी से गायब हो जायेंगी।

ज्यादा सोचना (Overthinking) एक addiction (आदत) है। और इससे बाहर आने के लिए हमे रोज प्रयास करने होंगे। अपनी आदतें सुधारनी होंगी।

 

 

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