National youth day in Hindi | राष्ट्रीय युवा दिवस

National youth day in Hindi राष्ट्रीय युवा दिवस पर स्वामी विवेकानंद जी के विचारों, आदर्शों, जीवन शैली द्वारा युवाओं को प्रोत्साहित कर देश के भविष्य को बेहतर बनाने के लक्ष्य को पूरा करने के लिये स्वामी विवेकानंद जी के जन्मदिवस 12 जनवरी के दिन  मनाया जाता है!

1984 में भारत सरकार ने अपने महान आध्यात्मिक और दार्शनिक नेता का सम्मान करने और देश के युवाओं को उनके विचारों से प्रोत्साहित करने के लिए स्वामी विवेकानंद के जन्मदिन, 12 जनवरी को राष्ट्रीय युवा दिवस के रूप में घोषित किया था।

National youth day in Hindi | राष्ट्रीय युवा दिवस

 

Importance of youth day | युवा दिवस का महत्व

राष्ट्रीय युवा दिवस मनाने का मुख्य लक्ष्य भारत के युवाओं के बीच स्वामी विवेकानंद के आदर्शों और विचारों के महत्व को फैलाना है। भारत को विकसित देश बनाने के लिये उनके बड़े प्रयासों के साथ ही युवाओं की अनन्त ऊर्जा को जागृत करने के लिये यह बहुत अच्छा प्रयास है। किन्तु आज का युवा वर्ग निश्चित रुप से रास्ता भटक गया है। युवाओं में अपनी सभ्यता ,संस्कृतियों और मान्यताओं की कोई अहमियत नहीं रह गई है। हमारी युवा पीढ़ी नशे की तरफ भी अत्यधिक तीर्व गति से बढ़ रही है। किसी देश या परिवार की अच्छाई या बुराई की पहचान के लिए उस परिवार या देश के कुछ लोगों को उदाहरण के रूप में लिया जाता हैं। उसी के आधार पर उसका आकलन किया जाता है। हमारे देश की अत्याधिक युवा वर्ग इस गन्दी बीमारी की पकड़ में है जिस कारण आज हमारा देश अपनी प्रभुता खोता जा रहा है। राष्ट्रीय युवा दिवस लक्ष्य प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष तौर पर इन्ही असंगतियों पर प्रहार करना हैं।

ऐसी स्थिति में युवा वर्ग के अन्य सदस्यों की जिम्मेदारी बनती है की वे अपने बीच भटके साथियो को सुमार्ग पर लाने के लिए आगे आये। युवा ही राष्ट्र का भविष्य हैं। । आप सभी से आह्वान है आपने आस पास के युवाओ में राष्ट्र भावना का भाव जागृत करें उन्हें भटकने से रोकें। प्रयास कभी निष्फल नहीं होते हैं। इस युवा दिवस पर प्रण ले की उन भटके हुए युवाओं को स्वामी विवेकानंद जी के आदर्शों पर चलने हेतु प्रेरित करें और भटके मार्ग से सतमार्ग की ओर युवा पीढ़ी को ले जाये राष्ट्रहित में कार्य करें और इस राष्ट्र के भविष्य को उनके कर्तव्यों का बोध कराएं।

 

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राष्ट्रीय युवा दिवस को कैसे मनाए |  National youth day in Hindi

राष्ट्रीय युवा दिवस पर प्रत्येक युवा को स्वयं से कुछ न कुछ वचन अवश्य करने चाहिए।
राष्ट्रीय युवा दिवस पर युवाओ को अपने लक्ष्यों का निर्धारण अवश्य करना चाहिए। जिन्होंने पहले ही लक्ष्य निर्धारित किये हुए हैं, वो युवा हर साल अपने लक्ष्यों का विश्लेषण अवश्य करें।
विश्लेषण में वो देखे कि उनके लक्ष्य किस प्रकार समाजहित में हैं। कहाँ तक उन्होंने अपने लक्ष्यों को प्राप्त किया हैं। युवाओं को ऐसे लक्ष्यों का ही निर्धारण करना चाहिए जो समाजहित में हो।
राष्ट्रीय युवा दिवस पर युवाओ को एकत्रित होकर कुछ न कुछ कार्यकर्मो का आयोजन अवश्य करना चाहिए। इस दिन युवा सामाजिक जागरूकता अभियान अवश्य चलाए।

शिकागो सम्मेलन का भाषण | Swami Vivekananda Chicago Speech in Hindi

राष्ट्रीय युवा दिवस
शिकागो सम्मेलन

11 सितम्बर, 1893, स्वामी विवेकानंद शिकागो धर्म महासभा में :–

अमेरिकावासी बहनों तथा भाइयों,
आपने जिस सौहार्द्र और स्नेह के साथ हम लोगों का स्वागत किया है, उसके प्रति आभार प्रकट करने के निमित्त खड़े होते समय मेरा हृदय अवर्णनीय हर्ष से पूर्ण हो रहा है। संसार में संन्यासियों की सब से प्राचीन परम्परा की ओर से मैं आपको धन्यवाद देता हूँ; धर्मों की माता की ओर से धन्यवाद देता हूँ; और सभी सम्प्रदायों एवं मतों के कोटि कोटि हिन्दुओं की ओर से भी धन्यवाद देता हूँ।
मैं इस मंच पर से बोलने वाले उन कतिपय वक्ताओं के प्रति भी धन्यवाद ज्ञापित करता हूँ, जिन्होंने प्राची के प्रतिनिधियों का उल्लेख करते समय आपको यह बतलाया है कि सुदूर देशों के ये लोग सहिष्णुता का भाव विविध देशों में प्रचारित करने के गौरव का दावा कर सकते हैं। मैं एक ऐसे धर्म का अनुयायी होने में गर्व का अनुभव करता हूँ, जिसने संसार को सहिष्णुता तथा सार्वभौम स्वीकृति, दोनों की ही शिक्षा दी है। हम लोग सब धर्मों के प्रति केवल सहिष्णुता में ही विश्वास नहीं करते, वरन् समस्त धर्मों को सच्चा मान कर स्वीकार करते हैं। मुझे ऐसे देश का व्यक्ति होने का अभिमान है, जिसने इस पृथ्वी के समस्त धर्मों और देशों के उत्पीड़ितों और शरणार्थियों को आश्रय दिया है। मुझे आपको यह बतलाते हुए गर्व होता है कि हमने अपने वक्ष में यहूदियों के विशुद्धतम अवशिष्ट को स्थान दिया था, जिन्होंने दक्षिण भारत आकर उसी वर्ष शरण ली थी, जिस वर्ष उनका पवित्र मन्दिर रोमन जाति के अत्याचार से धूल में मिला दिया गया था। ऐसे धर्म का अनुयायी होने में मैं गर्व का अनुभव करता हूँ, जिसने महान् जरथुष्ट्र जाति के अवशिष्ट अंश को शरण दी और जिसका पालन वह अब तक कर रहा है। भाईयो, मैं आप लोगों को एक स्तोत्र की कुछ पंक्तियाँ सुनाता हूँ, जिसकी आवृति मैं बचपन से कर रहा हूँ और जिसकी आवृति प्रतिदिन लाखों मनुष्य किया करते हैं :

रुचिनां वैचित्र्यादृजुकुटिलनानापथजुषाम् !
नृणामेको गम्यस्त्वमसि पयसामर्णव इव!!

“जैसे विभिन्न नदियाँ भिन्न भिन्न स्रोतों से निकलकर समुद्र में मिल जाती हैं, उसी प्रकार हे प्रभो! भिन्न भिन्न रुचि के अनुसार विभिन्न टेढ़े-मेढ़े अथवा सीधे रास्ते से जाने वाले लोग अन्त में तुझमें ही आकर मिल जाते हैं।”
यह सभा, जो अभी तक आयोजित सर्वश्रेष्ठ पवित्र सम्मेलनों में से एक है, स्वतः ही गीता के इस अद्भुत उपदेश का प्रतिपादन एवं जगत् के प्रति उसकी घोषणा है।

ये यथा मां प्रपद्यन्ते तांस्तथैव भजाम्यहम् !
मम वर्त्मानुवर्तन्ते मनुष्याः पार्थ सर्वशः !!

“जो कोई मेरी ओर आता है , चाहे किसी प्रकार से हो मैं उसको प्राप्त होता हूँ। लोग भिन्न मार्ग द्वारा प्रयत्न करते हुए अन्त में मेरी ही ओर आते हैं।”
साम्प्रदायिकता, हठधर्मिता और उनकी बीभत्स वंशधर धर्मान्धता इस सुन्दर पृथ्वी पर बहुत समय तक राज्य कर चुकी हैं। वे पृथ्वी को हिंसा से भरती रही हैं, उसको बारम्बार मानवता के रक्त से नहलाती रही हैं, सभ्यताओं को विध्वस्त करती और पूरे पूरे देशों को निराशा के गर्त में डालती रही हैं। यदि ये बीभत्स दानवी न होती, तो मानव समाज आज की अवस्था से कहीं अधिक उन्नत हो गया होता। पर अब उनका समय आ गया है, और मैं आन्तरिक रूप से आशा करता हूँ कि आज सुबह इस सभा के सम्मान में जो घण्टाध्वनि हुई है, वह समस्त धर्मान्धता का, तलवार या लेखनी के द्वारा होने वाले सभी उत्पीड़नों का, तथा एक ही लक्ष्य की ओर अग्रसर होने वाले मानवों की पारस्पारिक कटुता का मृत्युनिनाद सिद्ध हो।

“आध्यात्म-विद्या और भारतीय दर्शन के बिना विश्व अनाथ हो जाएगा” यह स्वामी जी का दृढ़ विश्वास था। अमेरिका में उन्होंने रामकृष्ण मिशन की अनेक शाखाएं स्थापित की। जिसमें अमेरिकी विद्वानों ने उनका शिषयत्व ग्रहण किया। स्वामी जी अपने को गरीबों का सेवक कहते थे। भारत के गौरव को देश-विदश में प्रज्ज्वलित करने का ध्येय भी स्वामी जी का ही था और उन्होंने उसका पूर्णत: निर्वहन भी किया। रामकृष्ण मिशन को स्थापित कर देश देशांतर में आध्यात्म की अलख जगायी। उन्होनें भारतवर्ष की यात्रा कर सभी को आध्यात्मिकता का बोध करवाया। उन्होनें अनेक स्थानों पर तप कर ज्ञान का उपार्जन किया है। स्वामी जी ने अपने सिद्धान्तों से विश्व में शिक्षा के क्षेत्र में भी अनन्य क्रांति का उद्घोष किया। उनके कथन आज भी लोगों को प्रोत्साहित करते है। 4 जुलाई 1902 को स्वामी जी ने देह का त्याग कर दिया।

Theme of youth day | युवा दिवस की थीम

प्रत्येक वर्ष युवा दिवस के अवसर पर एक थीम (theme) बनाई जाती है। पिछले 10 वर्षो से युवा दिवस के अवसर पर थीम इस प्रकार थी -:

  • 2011  –  सबसे पहले भारत
  • 2012 – विविधता में एकता का जश्न
  • 2013 – युवा शक्ति की जागरुकता
  • 2014 – ड्रग्स मुक्त संसार के लिये युवा
  • 2015 – यंगमंच और स्वच्छ, हरे और प्रगतिशील भारत के लिये युवा। (इसका नारा था, ‘हमसे है नयी शुरुआत’)
  • 2016 – विकास, कौशल और सद्भाव के लिए भारतीय युवा
  • 2017 – डिजिटल इंडिया के लिए युवा
  • 2018 – संकल्प से सिद्धि
  • 2019 – राष्ट्र निर्माण में युवा शक्ति का इस्तेमाल
  • 2020 – वैश्विक कार्य के लिए युवाओं की भागीदारी
  • 2021 – युवा – उत्साह नए भारत का

National youth day in Hindi

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